ई दिल्ली, 25 अ्नटूबर (वि.प्र.)
चुनाव आयाेग ने एसआईआर साॅफ्टवेयर की जानकारी देने से इन्कार कर दिया. कहा- यह सीक्रेट आरटीआई के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) अभियान के तहत देश भर में 13 कराेड़ से ज्यादा वाेटराें के नाम हटाए जाने काे लेकर जारी भारी विवाद के बीच भारत निर्वाचन आयाेग का एक नया रुख सामने आया है. चुनाव आयाेग ने सूचना का अधिकार के तहत उस साॅफ्टवेयर, ऐप या एआई टूल का नाम और वर्जन बताने से साफ इन्कार कर दिया है, जिसका इस्तेमाल वाेटर लिस्ट की गड़बड़ियाें काे पकड़ने में किया गया था. आयाेग ने तर्क दिया है कि यह जानकारी काॅमर्शियल काॅन्फिडेंस, ट्रेड सीक्रेट और एआई से जुड़ी है और आरटीआई कानून की धारा 8(1)(व) के तहत छूट प्राप्त है.यह आरटीआई आवेदन तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एम. ए. मुजीब अय्यूब की तरफ से दाखिल किया गया था. उन्हाेंने चुनाव आयाेग से कई तीखे सवाल पूछे थे.
चुनाव आयाेग ने क्या दिया जवाब? 16 अक्टूबर काे दिए अपने आधिकारिक जवाब में चुनाव आयाेग ने कई स्पष्टीकरण दिए. आयाेग ने धारा 8(1)(व) का हवाला देते हुए कहा कि साॅफ्टवेयर का नाम या वर्जन उजागर करने से थर्ड पार्टी की प्रतिस्पर्धी स्थिति काे नुकसान पहुंच सकता है.यह पूछे जाने पर कि नाम काटने की समीक्षा काैन करता है, आयाेग ने धारा 8(1)(स) का हवाला दिया, जाे किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा काे खतरे में डालने वाली जानकारी काे राेकने से जुड़ी है.चुनाव आयाेग ने कहा कि एसआईआर के लिए काेई नया साॅफ्टवेयर नहीं खरीदा गया है. जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 की धारा 13इ के तहत संबंधित विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एठज) ही तथ्याें और दस्तावेजाें के आधार पर नाम जाेड़ने या हटाने का वैधानिक अधिकारी ह