देश के जेन जी को तर्कसंगत और विवेकपूर्ण बनना चाहिए

‌‘सिम्बायोसिस लिटरेरी फेस्टिवल‌’ के उद्घाटन समारोह में प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने कहा

    26-Oct-2026
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विमाननगर, 25 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

सिम्बायोसिस स्कूल फॉर लिबरल आर्ट्स, सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड यूनिवर्सिटी) ने विमान नगर स्थित सिम्बायोसिस ईशान्य भवन में सिम्बायोसिस लिटरेरी फेस्टिवल के सातवें संस्करण का आयोजन किया. वेअर स्टोरीज गैदर विषय पर आधारित इस महोत्सव का उद्घाटन प्रसिद्ध कवि और गीतकार जावेद अख्तर ने 24 अक्टूबर को किया. इसके साथ ही उन्होंने अपने पिता और प्रसिद्ध उर्दू कवि जां निसार अख्तर द्वारा संपादित काव्य-संग्रह ‌‘हिंदुस्तान हमारा‌’ पर आयोजित चर्चा में भी भाग लिया. जावेद अख्तर ने कहा कि कलाकार को स्वतंत्र होना चाहिए. यदि आप राजनीति पर लिखना चाहते हैं, तो आपको इसकी स्वतंत्रता होनी चाहिए. कविताओं पर प्रतिबंध लगाना, किताबों पर प्रतिबंध लगाना एक स्वस्थ बात नहीं है. उन्होंने कहा ‌‘जेनरेशन जेड‌’ (जेन जी) को तर्कसंगत और विवेकपूर्ण बनना चाहिए. इस अवसर पर सिम्बायोसिस के संस्थापक और अध्यक्ष प्रो.डॉ. एस.बी. मुजुमदार, सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की चांसलर डॉ. विद्या येरवड़ेकर और एसएसएलए की निदेशक डॉ. श्वेता देशपांडे उपस्थित थीं.जावेद अख्तर ने कहा, किसी भी सरकार या राजनीतिक पार्टी ने शिक्षा को उतनी महत्ता नहीं दी जितनी उसकी आवश्यकता थी. इस कमी को डॉ. मुजुमदार जैसे जिम्मेदार नागरिकों ने काफी हद तक पूरा किया है. वे वह काम कर रहे हैं जो सरकार को करना चाहिए था. इसलिए, आप ही असली देशभक्त हैं. ‌‘हिंदोस्तान हमारा‌’ पर चर्चा के दौरान अख्तर ने कहा, साहित्य आपको बताता है कि दुनिया में अलग-अलग तरह के लोग कैसे रहते हैं. और इसके साथ ही, सभी मनुष्य एक जैसे ही हैं. दूसरों के प्रति जो सहानुभूति आप विकसित करते हैं, वही साहित्य है. प्रो.डॉ. एस.बी. मुजूमदार ने कहा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने मानव प्रगति में उल्लेखनीय योगदान दिया है, लेकिन मानविकी के बिना शिक्षा पूर्ण नहीं हो सकती. विज्ञान का छात्र अक्सर साहित्य, इतिहास या संस्कृति के बारे में बहुत कम जानता है, जबकि मानविकी का छात्र वैज्ञानिक विकास से अनजान रहता है. इस दूरी को समाप्त होना चाहिए.