नर्हे, 26 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
नर्हे स्थित जाधवर ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट्स के 13वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में बीजमाता पद्मश्री राहीबाई पोपेरे ने अपने संबोधन में कहा कि, मैंने प्रकृति और मिट्टी से शिक्षा ली है. गरीबी आने पर कभी शर्म नहीं करनी चाहिए और अमीरी आने पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए, यह मुझे मेरे पिता ने सिखाया था. हर किसी की थाली में जहर-मुक्त (रासायनिक खादों से मुक्त) सब्जी पहुंचनी चाहिए. धरती माता हमें अन्न देती है, हमें उसे बचाना चाहिए, तभी अगली पीढ़ी बचेगी. पुरस्कार वितरण समारोह संस्थान के संस्थान के सभागार में आयोजित किया गया था. इस अवसर पर वरिष्ठ संपादक विजय बाविस्कर, संस्थान के अध्यक्ष प्रा.डॉ. सुधाकरराव जाधवर, उपाध्यक्ष एड. शार्दुल जाधवर, कोषाध्यक्ष सुरेखा जाधवर सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. कार्यक्रम में इस वर्ष का जीवन गौरव पुरस्कार पूर्व सांसद और समाजसेवक प्रा. जोगेंद्र कवाड़े को प्रदान किया गया. इसके साथ ही, पद्मश्री राहीबाई पोपेरे को कृषि क्षेत्र का पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (पुणे) के अध्यक्ष औदुंबर उकिरडे को शैक्षणिक क्षेत्र का पुरस्कार, सिने अभिनेता मिलिंद शिंदे को कला क्षेत्र का पुरस्कार, पुणे अर्बन को-ऑप बैंक के अध्यक्ष निलेश ढमढेरे को सहकार क्षेत्र का पुरस्कार और समाज प्रबोधन चैरिटेबल ट्रस्ट के जयंत हिरे को सामाजिक क्षेत्र का पुरस्कार प्रदान किया गया. इस अवसर पर प्रा. जोगेंद्र कवाड़े ने कहा कि अनुशासन, समर्पण और दृढ़ निश्चय- इन तीन बातों को हर किसी को ध्यान में रखना चाहिए. शिक्षक एक शिल्पकार होता है. छात्रों को गढ़ने की प्रक्रिया आसान नहीं होती है. अग्निशमन दल, पुलिस, पत्रकार, सेना और एम्बुलेंस चालकों के बच्चों को केजी से लेकर पीजी तक की शिक्षा की फीस में 25 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. इसके अलावा, जिन विद्यार्थियों ने 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, यदि वे संस्थान में प्रवेश लेते हैं, तो उन्हें शिक्षण शुल्क में 15 प्रतिशत की छूट दी जाएगी. इसके लिए छात्रवृत्ति पत्र इस अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों के हाथों प्रदान किया गया.
एक छोटे से स्कूल का रूपांतरण वटवृक्ष में हो गया एड. शार्दुल जाधवर ने कहा कि हम समाज को क्या दे सकते हैं, इस बात का दिन-रात विचार करने वाले व्यक्तियों का आज सम्मान किया गया. जिस इलाके में चौथी कक्षा के बाद पढ़ाई की सुविधा नहीं थी, ऐसी जगह पर प्रा.डॉ. सुधाकर जाधवर ने स्कूल शुरू किया. आज इस स्कूल का वटवृक्ष में रूपांतरण हो गया है.