प्रश्न : चमत्काराें से लाेग ठीक हाे जाते हैं, उसका क्या कारण है?
बहुत से कारण हाे सकते हैं. लेकिन चमत्कार नहीं है. चमत्कारिक भी मालूम हाे, चमत्कार नहीं है. आदमी के मन के बहुत से नियम हैं जिनका हमें हाेश नहीं है. और उन नियमाें के कारण बहुतसी घटनाएं घटती हैं.
एक युवक मेरे पास आता था. पहली दा जब आया ताे किसी डाक्टर ने भेजा था. उसके पेट में दर्द था, वह डाक्टर का इलाज कर-कर के परेशान हाे गया. ताे उसने ताे र्सिफ अपनी बला टाली, क्याेंकि उस डाक्टर ने मुझे कहा कि यह ताे बडी मुश्किल बात हाे गई! मैंने ताे इसकाे इसलिए हटाया कि यह राेज मेरे दवाखाने में बैठ जाता आकर और इसकी वजह से दूसरे मरीजाें पर बुरा असर पडता. क्याेंकि यह कहता : साल भर हाे गया, अभी तक ठीक नहीं हुआ. ताे मैंने उसके हाथ जाेडे और कहा तू उनके पास जा; अब उनसे ही ठीक हाेगा. हमसे ठीक नहीं हाेने वाला. र्सिफ बला टालने के लिए आपके पास भेजा था और वह ठीक हाे गया. वह मेरे पास आया और कहा कि मुझे अपने हाथ का छुआ पानी दे दें, वह डाक्टर ने कहा है. मैंने कहा, बात क्या है? उसने कहा कि बात कुछ नहीं है.
साल भर से मुझे पेट की तकलीफ है. और जिसकाे डाक्टर ठीक न कर पाया हाे, वह िफर चमत्कार से ठीक हाेता है.
डाक्टर ठीक नहीं कर पाया, ताे इसका मतलब यह कि शरीर में काेई राेग नहीं है. नहीं ताे डाक्टर ठीक कर लेता. ऐसी काेई बात नहीं थी. राेग र्सिफ मन में है. उसका र्सिफ खयाल है कि पेट में दर्द है.
मैंने उसकाे इनकार किया. उसकाे कहा कि यह मैं करूंगा नहीं, क्याेंकि कल और लाेग आ जायें! तब उसने मेरे पैर पकड़ लिए. उसने कहा, आप क्या कह रहे हैं! मैं किसी काे बताऊंगा नहीं. यह बात छिपती नहीं. साल भर का बीमार है अगर ठीक हाे गया, ताे तू ताे ठीक हुआ हम ंस गए! िफर काेई और आ जायेंगे! बारह बजे रात तक मैं उसे राेके रहा.
जब वह बिलकुल छाती पीट राेने लगा, ताे मेरी मां माैजूद थीं वहां, उन्हाेंने मुझे कहा कि बेचारा र्सिफ पानी ही मांगता है.
तीन घंटे से मैं सुन रही हूं तुम्हारी बातचीत. इसकाे पानी दे दाे. हाे ठीक, न हाे ठीक, झंझट मिटाओ और साे जाओ.
पर तीन घंटे उसे राेकना जरूरी था.
क्याेंकि जितना मैंने उसे राेका, उतना उसकाे पक्का हाेता गया कि पानी में कुछ है. नहीं ताे िफर राेकने की बात भी क्या थी. मजबूरी में मैंने उसे पानी दिया. मैने कहा कि तू कसम खा, किसी काे बताएगा नहीं घर में. जब उसने कसम खाई, तब मैंने उसे पानी दिया. पानी पीते से वह बाेला कि अरे! मेरा दर्द ताे चला गया और दर्द उसका चला गया.
यह न ताे काेई संयाेग है, न काेई चमत्कार है. उसका एक वहम था. और वहम काे निकालने के लिए एक ही उपाय है किसी पर भराेसा आ जाये. और काेई उपाय नहीं है. वहम के निकालने का एक ही उपाय है कि उससे बडा वहम पैदा हाे जाये.