चिंचवड़, 27 अ्नटूबर (आ.प्र.)
बाैद्ध धर्म में प्रज्ञा, करुणा, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के मूल्याें काे रेखांकित करते हुए महिला नेतृत्व, ऐतिहासिक याेगदान, वैश्विक भिक्खुणी परंपरा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विभिन्न विषयाें पर चिंचवड़ में शनिवार काे आयाेजित अंतरराष्ट्रीय बाैद्ध महिला परिषद में विचार-मंथन किया गया.
डाॅ. उज्ज्वला अंदुरकर, डाॅ. संध्या हरिभक्त, डाॅ. वैशाली भामरे और लक्ष्मीकांता माने ने इस सम्मेलन का आयाेजन किया था. विज्डम इन माेशन, कैटलिस्ट फाउंडेशन और डाॅ. बाबासाहेब आंबेडकर संशाेधन व प्रशिक्षण संस्थान (बार्टी) के संयुक्त तत्वावधान में प्राे. रामकृष्ण माेरे ऑडिटाेरियम में यह परिषद संपन्न हुई. इस परिषद में ज्ञान से नेतृत्व, संवाद से समाज निर्माण करने तथा बाैद्ध मूल्याें काे समाज में आत्मसात करने के बारे में चर्चा की गई.
इस परिषद में लगभग एक हजार उपासक- उपासिकाओं ने उपस्थिति दर्ज कराई. देश- विदेश की बाैद्ध भिक्खुणियाें, शाेधकर्ताओं, विचारकाें, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्राें की महिलाओं ने इस परिषद में भाग लिया.
कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध वंदना के साथ हुई. तत्पश्चात बुद्ध गीताें पर नृत्य प्रस्तुत किया गया. इसके बाद वियतनामी बाैद्ध परंपरा के मंत्राेच्चार प्रस्तुत किए गए.
परिषद की मुख्य अतिथि, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता प्राे. विमल थाेरात ने आह्वान किया कि बुद्ध और आंबेडकरी विचाराें काे आगे बढ़ाने के लिए अब ‘जेन ज़ी’ पीढ़ी काे पहल करनी चाहिए.