रक्त विकार काे दूर करने के लिए 50 ग्राम प्याज के रस में 10 ग्राम मिश्री तथा 1 ग्राम भूना हुआ सफेद जीरा मिला लें.
यदि अजीर्ण की शिकायत हाे ताे प्याज के छाेटे-छाेटे टुकड़े काटकर उसमें एक नीबू निचाेड़ लें या सिरका डाल लें तथा भाेजन के साथ इसका सेवन करें.
बच्चाें काे बदहजमी हाेने पर उन्हें प्याज के रस की तीन-चार बूंदें चटाने से लाभ हाेता है.
अतिकेलिसिन और रायबाेफ्लेविन (विटामिन बी) पर्याप्त मात्रा में हाेता है. इसकी गंध एन-प्राेपाइल-डाय सल्फाइड के कारण आती है. यह पदार्थ पानी में घुलनशील अमीनाें अम्लाें पर एन्जाइम की क्रिया के कारण बनता है. यही कारण है कि प्याज काे काटने पर आंख से पानी आता हैं.
यह आंख के लिये एक बेहतरीन औषधि भी है यह आंख साफ करता है. इससे परेशान हाेने की जरूरत नहीं है.
गर्मियाें में राेज प्याज जरूर खाएं. जब भी आप खाना खाएं. आपकाे लू लगने से बचायेगा. अगर लू लग गई हाे ताे प्याज का रस दाे चार चम्मच पीएं. रस कनपटी व छाती पर मलें. एक छाेटा सा प्याज अपने पाॅकेट में रखे रहें.
प्याज पीसकर बालाें पर लेप करने से बाल काले रंग के उगने लगेंगे. प्याज का रस रगड़े सर पर जहां के बाल उड़ गये हैं. बाल दुबारा पैदा हाेने लगेंगे. गिरने बंद भी हाे जायेंगे.
प्याज में बहुत-से उपयाेगी तत्व पाए जाते हैं. प्याज में 1.2 प्रतिशत प्राेटीन, 0.1 प्रतिशत वसा, 11.6 प्रतिशत कार्बाे हाइड—ेट, 0.18 प्रतिशत कैल्शियम, 0.5 प्रतिशत ास्ाेरस, लाेहा पाया जाता है.