यहूदियाें की माैलिक मान्यता यही है कि वे ईश्वर के चुने हुए लाेग हैं. उनके अलावा और काेई ईश्वर का चुना हुआ व्यक्ति नहीं है. वह जाति ईश्वर के द्वारा चुनी गई है. और इसी मूर्खतापूर्ण बात ने उन्हें सदियाें तक परेशान रखा है. उनकी यह अहंकार की घाेषणा उनकाे जगह-जगह पीड़ित करवाई है. कितना उन्हाेंने सहा है! लेकिन बड़ी अजीब प्रक्रिया है जीवन की.
तुम्हें जिस चीज के लिए जितनी कुरबानी देनी पड़ती है, तुम्हारे माेह उससे उतने ही ज्यादा हाे जाते हैं. आदमी का गणित बहुत अजीब है! जिस चीज के लिए तुम्हें जितनी कुरबानी देनी पड़े, वह उतनी महंगी हाे गई; उतनी कीमती हाे गई. और जाे चीज तुम्हें मुफ्त मिल जाए, उसकी काैन िफक्र करता है! मुफ्त मिली- मुफ्त गई. क्या िफक्र! यहूदियाें ने तीन हजार साल निरंतर कुरबानी दी है. लाखाें यहूदी मारे गए हैं, इस एक विचार के आधार पर, कि हम चुने हुए व्यक्ति हैं. इसकाे वे छाेड़ नहीं सकते. यह क्या तुम मानवतावाद वगैरह की बातें कर रहे हाे! इसका मतलब यह है- मानवतावाद का अर्थ यह हाेता है कि सभी मनुष्य समान हैं.
काेई चुना हुआ नहीं है. काेई ईश्वर के द्वारा विशिष्ट रूप से चुना गया नहीं है.
जर्मनाें ने इतनी बड़ी कुरबानी दीअडाेल्फ हिटलर के हाथाें राजी हाे गए अपने काे बरबाद करने काे- र्सिफ एक बात के आधार पर, कि अडाेल्फ हिटलर ने उनसे कहा कि तुम ईश्वर के चुने हुए व्यक्ति हाे. यह जाे नार्डिक जाति है, ये जाे शुद्ध जर्मन हैं, ये पैदा ही ईश्वर ने इसलिए किए हैं कि ये दुनिया पर राज्य करें. इसमें दाेहरा प्रलाेभन था. एक ताे ईश्वर के द्वारा चुने गए लाेग- यह रस काैन न लेना चाहेगा? और दूसरा: दुनिया पर राज्य करने का प्रलाेभन.
जर्मन जाति मरने काे राजी हाे गई! छाेटीसी जाति ने सारी दुनिया काे हिला दिया. सारी दुनिया काे इकट्ठा हाेकर लड़ना पड़ा, तब भी बामुश्किल जीते. क्याेंकि जाे लड़ रहे थे, उनके पास ऐसा काेई बल न था; ऐसी काेई पागलपन की धारणा न थी, जैसी जर्मनाें के पास थी. तुम जानकर चकित हाेओगे यह भी कि जर्मनाें से र्सिफ साथ बना जापानियाें का. क्याेंकि जापानी मानते हैं कि उनका मूल उदगम सूर्य से हुआ. वे सूर्य देवता के पुत्र हैं! जर्मन सम्राट सूर्य का वंशज है.
वे शिष्ट लाेग हैं. जर्मनी में और जापान में एक आंतरिक समझाैता हाे गया कि हम पश्चिम सम्हालते हैं, तुम पूरब सम्हाल लाे. तुम पूरब के विशिष्ट लाेग हाे, हम पश्चिम के विशिष्ट लाेग हैं. उन्हाेंने एक दूसरे की धारणा काे स्वीकार कर लिया. उनमें तालमेल बैठ गया.
बाकी सारी दुनिया काे उनके खिलाफ लड़ना पड़ा. जापानी भी जिस ढंग से लड़े, काेई कभी नहीं लड़ा. जी-जान से लड़े. और जितनी बड़ी कुरबानी देनी पड़ती है, उतने ही आग्रह मजबूत हाेते चले जाते हैं. क्याेंकि जितना खून सींचा हमने, उतना ही हमारा माेह प्रगाढ़ हाे जाता है.