मध्य प्रदेश के रतलाम में धर्म और भक्ति का महासंगम

प. पू. सुमनप्रभाजी म. सा. की 9 दिवसीय मौन साधना संपन्न : महामांगलिक श्रवण करने उमड़ा जनसमूह

    29-Oct-2026
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रतलाम, 28 अक्टूबर (आ. प्र.)

 मालव केसरी पू. गुरुदेव सौभाग्यमलजी म. सा. के सुशिष्य रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पू. श्री प्रकाश मुनिजी म. सा. के रतलाम चातुर्मास में रविवार (25 अक्टूबर) को प्रवचन प्रभाविका उपप्रर्वतिनी श्री सुमनप्रभाजी म. सा. ने नौ दिवसीय मौन साधना पूर्ण कर महामांगलिक दी. इसे श्रवण करने देश के अनेक स्थानों से अपार जनसमूह उमड़ा. मौन साधना की पूर्णता में प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी म. सा. कीं धर्मसभा में हुई. सभा से पूर्व चौमुखीपुल स्थित डीपीके परिसर से जय-जयकार के साथ चल समारोह निकला, जिसमें उपप्रर्वतिनी श्री सुमनप्रभाजी म. सा. के साथ अन्य महासती और समाजजन शामिल हुए. धर्म सभा में प्रवर्तकश्री प्रकाश मुनिजी म. सा. ने धर्म प्रभावना कर रही महासतीवृंद के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला. धर्मसभा को पू. श्री दर्शन मुनिजी म. सा. एवं महासती चंदनबाला जी महासती एवं श्री स्वर्णाश्रीजी ने भी संबोधित किया. देवेंद्र प्रभाजी म. सा. , विभा श्रीजी म. सा. और नवदीक्षित महासती श्री तेजस्विनीजी म. सा. ने स्तवन प्रस्तुत किया. प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने कहा कि, आत्म- कल्याण के लिए साधना श्रेष्ठ माध्यम है. इसका अनुसरण सबको करना चाहिए. इस अवसर पर महासती श्री चांदकुंवरजी की 103 वीं दीक्षा जयंती मनाई गयी.
 
महासतीवृंद का धर्म के प्रति बड़ा योगदान है

धर्म प्रभावना कर रही महासतीवृंद का योगदान बहुत बड़ा है. संघ में चार प्रवर्तिनी पद की स्थापना की गई थी और चारों का परिवार आज धर्म का प्रचार-प्रसार कर रहा है. साध्वियों ने सदैव संघ की गरिमा बढाई है. साध्वियां अपने ज्ञान बल से जिन शासन की विशेष प्रभावना करती है. इनका गुरू के प्रति समर्पण भी प्रेरणास्पद होता है. संसार में जो भी सेवा करते है. उन्हें आशीर्वाद मिलते है और आशीर्वाद फलते भी है. इससे जीवन खिलता है. - प्रवर्तकश्री प्रकाश मुनिजी