लक्ष्मी रोड, 2 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
सोने की हॉलमार्किंग फीस में भारी बढ़ोतरी के साथ ही नकली हॉलमार्किंग के मामले बढ़ने की आशंका गहरा गई है. खासतौर पर छोटे शहरों (टियर-2, टियर-3 और टियर-4) में इसे लेकर चिंता अधिक है. ऑल इंडिया जेम्स् एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी- GJC) ने उपभोक्ता मामले मंत्रालय और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से अनुरोध किया है कि सोने की हॉलमार्किंग फीस 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये प्रति आर्टिकल करने के फैसले को वापस लिया जाए और इसे पुरानी दर यानी 45 रुपये पर ही रखा जाए. उद्योग जगत का कहना है एक ओर जहां आभूषण निर्माताओं (ज्वेलर्स) को बढ़ा हुआ शुल्क खुद वहन करना पड़ सकता है, वहीं दूसरी ओर बीआईएस केयर (BIS Care) ऐप के जरिए ‘हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन’ (HUID) नंबर की जांच करने को लेकर ग्राहकों में जागरूकता अभी भी काफी कम है. गौरतलब है कि गहने खरीदते समय हॉलमार्किंग का यह शुल्क ग्राहकों द्वारा ही चुकाया जाता है. जीजेसी ने बीआईएस से संशोधित दर के पीछे अतिरिक्त उपकरण, जनशक्ति, प्रोसेसिंग और भंडारण लागत सहित एक विस्तृत लागत मूल्यांकन मांगा है. इसके अलावा, जीजेसी ने अनिवार्य फोटोग्राफी से जुड़ी अतिरिक्त लागत पर भी सवाल उठाया है और यह तर्क दिया है कि तस्वीरों की जालसाजों द्वारा कॉपी या हेरफेर की जा सकती है. जीजेसी ने उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी और बीआईएस के समक्ष यह मुद्दा उठाते हुए हॉलमार्किंग शुल्क की दर को वर्तमान 75 रुपये से घटाकर पुरानी दर 45 रुपये प्रति वस्तु करने की मांग की है. उनका कहना है कि हाल ही में की गई इस बढ़ोतरी से शुल्क में 66.67% की वृद्धि हुई है, जिससे अनिवार्य प्रणाली के तहत उद्योगों पर अनुपालन (कमप्लायंस) का बोझ काफी बढ़ गया है. उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि क्या इस बढ़ी हुई लागत से उपभोक्ताओं की सुरक्षा में भी कोई सुधार हुआ है. काउंसिल का कहना है कि हॉलमार्किंग में लगने वाला समय भी पहले के लगभग 6 घंटे से बढ़कर अब 24 से 36 घंटे हो गया है. देश में लगभग 800 जिले ऐसे हैं जहां अब भी हॉलमार्किंग में होने वाली आधुनिक धोखाधड़ी के प्रति संवेदनशील/ असुरक्षित हैं. 800 में से केवल 10% जिले ही बीआईएस सत्यापन प्रक्रिया को समझते हैं. मान्यता प्राप्त एएचसी नेटवर्क में जुलाई 2022 से जुलाई 2026 के बीच 29.26% का विस्तार हुआ, जबकि एचयूआईडी के साथ हॉलमार्क किए गए सोने के आभूषणों की कुल संख्या में कम से कम लगभग 425% की वृद्धि दर्ज की गई. इस अवधि के दौरान 52.62 करोड़ से अधिक अतिरिक्त आभूषणों को प्रोसेस किया गया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मान्यता प्राप्त परख एवं हॉलमार्किंग केंद्रों की संख्या जुलाई 2022 में 1,220 से बढ़कर जुलाई 2026 में 1,577 हो गई है. वहीं एचयूआईडी के साथ हॉलमार्क किए गए सोने के कुल आभूषणों/वस्तुओं की संख्या बढ़कर 65 करोड़ से अधिक हो गई है. वित्तीय वर्ष 2026 में आभूषणों के 13.22 करोड़ वस्तुओं पर हॉलमार्किंग की गई. नई दरों के आधार पर, परिषद का अनुमान है कि इससे पूरे उद्योग/पारिस्थितिकी तंत्र पर लगभग 400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा, जिसके अलावा करीब 80 करोड़ रुपये का जीएसटी भी लगेगा. निर्धारित शुल्क में बड़ी वृद्धि गोल्ड हॉलमार्किंग शुल्क 4 मार्च 2022 को 35 रुपये से बढ़कर 45 रुपये प्रति वस्तु (आर्टिकल) हो गया था, जो कि 28.57% की वृद्धि थी. हाल ही में किए गए बदलाव में इसे 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दिया गया है, जो 66.67% की एक और वृद्धि है. इस प्रकार, यह शुल्क अब मार्च 2022 से पहले के अपने स्तर से 114.29% अधिक हो चुका है. सोने और चांदी की जांच लागत भिन्न 1 सितंबर 2025 से हॉलमार्क वाली चांदी की वस्तुओं पर एचयूआईडी आधारित पहचान लागू कर दी गई है, जबकि निर्धारित चांदी हॉलमार्किंग शुल्क 35 रुपये प्रति वस्तु ही बना हुआ है. जीजेसी इस बात को स्वीकार करता है कि सोने और चांदी की जांच लागत भिन्न हो सकती है. फिर भी, केवल HUIDआधाि रत पहचान से इस संशोधित अंतर को नहीं समझाया जा सकता.
इस कदम का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता हैबीआईएस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब स्थिर लागत को इतने अधिक आभूषणों पर बांटने का अवसर उपलब्ध है, तो 45 रुपये के शुल्क को बरकरार रखने या कम करने में मदद क्यों नहीं मिल रही है और इसके बजाय शुल्क में 66.67% की भारी वृद्धि क्यों आवश्यक है. देश के 800 जिलों में से केवल 10% जिलों में ही बीआईएस ऐप को लेकर पर्याप्त जागरूकता है. बीआईएस की फोटोग्राफी आवश्यकता के तहत एक प्रमुख चिंता यह है कि इसे नकली हॉलमार्किंग को रोकने के लिए लागू किया गया था, लेकिन यह उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है. आज की तकनीक जालसाजों को तस्वीरों की नकल करने, वजन का मिलान करने और उसी आभूषण को अलग शुद्धता में पेश करने की अनुमति देती है, जिससे इस कदम का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाता है. - राजेश रोकड़े, अध्यक्ष, ऑल इंडिया जेम्स् एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी)
जीजेसी हॉलमार्किंग की जिम्मेदारी लेने तैयार जीजेसी ने वेिशसनीय हॉलमार्किंग और उपभोक्ता संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए मांग की है कि निर्धारित शुल्क में 66.67% की वृद्धि को उचित ठहराने से पहले एक पारदर्शी लागत मूल्यांकन आवश्यक है. साथ ही उन्होंने फर्जी हॉलमार्किंग, अनधिकृत एएचसी, बीआईएस लोगो के दुरुपयोग और बिना वैध एचयूआईडी के बेचे जाने वाले आभूषणों के खिलाफ बीआईएस द्वारा की जाने वाली सख्त कार्रवाई का समर्थन किया है. उन्होंने अपने ज्ञापन में कहा है कि वे पूरे भारत में एसेसमेंट एवं हॉलमार्किंग केंद्र खोलने और 45 रुपये की मूल दर पर ही हॉलमार्किंग कराने की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है.
GJC की बीआईएस से अपील
सोने के हॉलमार्किंग शुल्क को 75 रुपये से घटाकर तुरंत वापस 45 रुपये प्रति वस्तु किया जाए. शुल्क में की गई 30 रुपये की वृद्धि से जुड़ा लागत आकलन सार्वजनिक किया जाए, जिसमें फोटोग्राफी का अतिरिक्त खर्च और एएचसी ( हॉलमार्किंग सेंटर) पर बीआईएस के लेवी शुल्क को 4.50 रुपये से बढ़ाकर 7.50 रुपये प्रति वस्तु करने का आधार शामिल हो. भविष्य में किसी भी बदलाव पर विचार करने से पहले हॉलमार्किंग की वास्तविक मात्रा, केंद्र-वार उपयोग और ‘इकोनॉमीज ऑफ स्केल’ का अध्ययन किया जाए. ज्वेलर्स, एएचसी और उपभोक्ता प्रतिनिधियों से परामर्श किया जाए तथा बाद में प्रस्तावित किसी भी दर का कारण सार्वजनिक किया जाए.