प्रश्न ः मेरे भीतर बहुत क्राेध है और इससे मुझे बहुत भय लगता है. क्राेध के इस भय से निपटने के लिये मैं क्या करूं?
भय बुरा है - क्राेध ठीक है. यदि तुम्हें भय और क्राेध के बीच में से चुनना ही हाे, ताे क्राेध काे चुनना, क्याेंकि क्राेध ऊष्ण ऊर्जा है. क्राेध जीवन ऊर्जा है; भय मृत्यु है. भय तुम्हें सिकुड़ने में मदद करता है. क्राेध जीवन की सेवा में है, क्राेध में कुछ मूल्य है, बड़ा मूल्य है. इसलिए भय की जगह क्राेध काे चुनना शुरू कराे... लेकिन बचपन में इस इस तरह घटता हैः माता-पिता क्राेध काे दबाने के लिए भय दिखाते हैं. वे बचपन में बहुत भय पैदा करते हैं-कि बच्चे काे सजा दी जाएगी, कि मां मर जाएगी, मां बच्चे काे छाेड़ देगी, या कुछ गलत हाे जाएगा यदि बच्चा मां या पिता की नहीं सुनेगाइसलिए क्राेधित हाेने की जगह, बच्चा भयभीत हाे जाता है.
ताे तीन चीजें तुम्हें करनी हैं.... पहली, यदि यह संभव है कि तुम ऑिफस से अपने घर वापस दाैड़ते हुए जा सकते हाे ताे यह बहुत सहयाेगी हाेगा. यदि संभव है, दाैड़ना शुरू कराे-दाैड़ने से अधिक अच्छा कुछ भी नहीं है-तीन, चार मील दाैड़ाे. धीरे-धीरे, इसे तीन, चार मील तक बढ़ाओ, लेकिन इस दाैड़ने की प्रक्रिया में सचमुच ध्यान की तरह जाओ. सुबह सवेरे अकेले निकल जाओ तब तुम हवा, सूरज, वातावरण, वृक्ष, पक्षियाें के साथ अधिक मुक्त हाेओगे.
दाैड़ने में प्रतिस्पर्धा मत लाओ. यदि तुम किसी के साथ दाैड़ते हाे-हमारे मन प्रतिस्पर्धा से इतने विषाक्त हाे चुके हैं कि-स्वाभाविक ही तुम प्रतिस्पर्धा प्रारंभ कर देते हाे. यदि तुम किसी के साथ दाैड़ते हाे, तुम उसे परास्त कर देना चाहते हाे-अनजाने में, तुम प्रथम आना चाहते हाे. जहर बहुत गहरे चला गया है, और जब दाैड़ना प्रतिस्पर्धा बन जाए ताे यह ध्यान नहीं रहता है; बस खेल-कूद बन जाता है, न कि ध्यान. ताे दाैड़ना गैर प्रतिस्पर्धात्मक हाेना चाहिए-एक बात...
दूसरी बात ः दाैड़ना बिना किसी स्व-आलाेचना के हाेना चाहिए. तुम्हें इससे अधिक अच्छा करना है, तुम्हें इससे अधिक अच्छा करना है, तुम्हें अधिक दाैड़ना चाहिए, तुम अधिक अच्छा कर सकते हाे-वह मूर्खता है. तुम किसी के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे हाे, तुम बस इसके राेमांच का आनंद ले रहे हाे. इसलिए बिना किसी स्व-आलाेचना के दाैड़ाे-बस मजा लेने के लिए! यदि हर दिन कम से कम एक काम बिना किसी मूल्यांकन के कर सके, ताे वह ध्यान बन जाता है. बस मजे के लिए! और हम मजे के खिलाफ इतनी बुरी तरह से संस्कारित हाे गये हैं; हर चीज उपयाेगिता में बदल देते हैं. लाेग पूछेंगे, ‘तुम क्याें दाैड़ रहे हाे? तुम माेटे नहीं हाे, िफर क्याेें? तुम प्रतिस्पर्धा करने नहीं जा रहे हाे, तब क्याें?’ हम हमेशा उपयाेगिता खाेजने के लिए प्रशिक्षित किए गए हैं, और जाे कुछ भी सुंदर हाेता है वह तब जब हम गैर उपयाेगी हाेते हैं-जब हम कुछ र्सिफ आनंद के लिए करते हैं, अत्यंत आनंद के लिए करते हैं. और दाैड़ना बहुत गहरा जाता है. इसी कारण मैं इसका सुझाव दे रहा हूं. भय ताे है; भय के नीचे क्राेध है और क्राेध के नीचे, वहां प्रेम है, इन सब चीजाें के नीचे कुछ खाेजा जाना है. ताे इन सभी पताें के नीचे कार्य करना प्रांरभ कराे. दाैड़ना मानवता की गहनतम पर्त है क्याेंकि मनुष्य हजाराें सालाें से दाैड़ रहा है. बस कुछ साै सालाें से मनुष्य ने दाैड़ना बंद कर दिया है.
वह शिकारी था-दाैड़ना बुनियादी बात थी. अभी भी दक्षिण अ्रीका में, शिकारी हाेते हैं; वहां ऐसे कबीले हैं जाे र्सिफ शिकारी कबीले हैं. उनके सुंदर शरीर हैं, इतनी लंबी गर्दनें, कि जानवर भी थाेड़ा ईर्ष्या महसूस करने लगें. वे दाैड़ाक हैं ः वे बीस, तीस, चालीस मील बिना किसी अंतराल के दाैड़ सकते हैं. उन्हें जानवराें के साथ दाैड़ना हाेता है. कभी वे जानवराें का शिकार करते हैं, कभी जानवराें उनका शिकार कर देते हैं, और हर बार उन्हें दाैड़ना हाेता है, और तेज गति से दाैड़ना; यह जीवन और माैत का सवाल है. ताे मानवता की गहनतम पर्त शिकार है.