ड्राई फ्रूट्स की कीमतें बढ़ने का दीपावली व गिफ्टिंग पर असर

कम बजट के कारण क्वालिटी कम होने का अनुमान; युद्ध, कम फसल व आयात की दिक्कतों का परिणाम

    30-Oct-2026
Total Views |
 
DryFruits
गुलटेकड़ी, 29 अक्टूबर
(आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
दीपावली के दाैरान एक-दूसरे काे गिफ्ट देने के लिए ड्राई फ्रूट्स के बाॅक्स की हर साल अच्छी मांग रहती है. हालांकि, इस साल ड्राई फ्रूट्स की कीमतें बढ़ने से बाॅक्स के दाम भी बढ़ गए हैं.
 
इसके परिणाम स्वरूप कुछ ग्राहकाें ने वैकल्पिक वस्तुओं और अन्य खाद्य पदार्थाें की तलाश शुरू कर दी है, ताे कुछ ने बाॅक्स का वजन या मात्रा कम करने का फैसला किया है.
 
वर्तमान में ईरान, सऊदी अरब और खाड़ी देशाें में युद्ध शुरू हाेने के कारण ड्राय फ्रूट्स (सूखे मेवे) के आयात में बाधा आ रही है. इसका सीधा असर इनकी कीमतें बढ़ने पर भी पड़ा है. इसके बावजूद, दीपावली जैसा सबसे बड़ा त्याेहार साल में एक ही बार आने के कारण अच्छा व्यापार हाेने की व्यापारियाें काे उम्मीद है. व्यापारियाें का अनुमान है कि इस साल की दीपावली तय तारीखाें यानी 6 से 12 नवंबर के बीच आई है.
 
पिछले महीने का वेतन और दीपावली का बाेनस, इस तरह की अतिरिक्त राशि लाेगाें के हाथाें में आएगी. इसलिए दीपावली अच्छी रहेगी और आने वाले कुछ दिनाें में ग्राहक खरीदारी के लिए बाजार में आएंगे.ड्राई फ्रूट के बाजार पर नजर डालें ताे पिछली दीपावली की तुलना में काजू के दाम आमताैर पर 100 रुपये बढ़ गए हैं. बादाम के दाम भी बढ़ गए हैं. वहीं, पिस्ता की कीमतें लगभग दाेगुनी हाे गई हैं. इस वजह से गिफ्ट देने वालाें का बजट ही गड़बड़ा गया है. डाॅलर के रेट लगातार स्थिर बने हुए हैं, लेकिन इससे भी महंगाई बढ़ गई है. विदेश में युद्ध का असर पड़ रहा है. इसके अलावा, वहां फसलें भी अच्छी नहीं हुई हैं, फसलें प्रभावित (क्राॅप अफेक्टेड) हुई हैं. अफगानिस्तान, ईरान, इराक और अमेरिका की मुख्य फसलें युद्ध की वजह से प्रभावित हुई हैं. इनसे आयात हाेने वाले सामान में महंगाई है.
 
विदेशी सरकाराें के टैरिफ और कुछ अन्य फैसलाें का भी उत्पादाें के आयात और उनकी कीमताें पर असर पड़ा है. दीपावली पर ड्राई फ्रूट्स गिफ्ट करने का चलन है, जिसमें बाॅक्स पैकिंग या आकर्षक पैकिंग का बहुत महत्व हाेता है.
 
उस बाॅक्स में आमताैर पर बादाम, किशमिश, नमकीन पिस्ता, अंजीर, खुबानी, काली किशमिश और खजूर जैसे महत्वपूर्ण ड्राई फ्रूट्स हाेते हैं, जिनका आयात किया जाता है. हालांकि काजू भारत का ही है, लेकिन देश की जरूरत काे पूरा करने के लिए यहां उतना उत्पादन नहीं हाेता.
 
इसके अलावा, हमारे देश का काजू उच्च गुणवत्ता वाला हाेने के कारण उसका निर्यात किया जाता है, और बाहर के देशाें से खासकर तंजानिया या दक्षिण अफ्रीका से यहां काजू की आवक हाेती है. इस वर्ष काजू के दाम भी सामान्यतः प्रति किलाे 100 रुपये बढ़ गए हैं.
 
व्यापारी बताते हैं कि इस साल अमरीका और ईरान में नमकीन पिस्ते की फसल पर बहुत बुरा असर पड़ा है. दाेनाें ही देशाें में करीब 25% फसल प्रभावित हुई है. इसी वजह से पिस्ते के भाव, जाे पिछले साल 1,400 से 1,800 रुपये प्रति किलाे थे, इस साल बढ़कर 1,900 से 2,400 रुपये प्रति किलाे तक पहुंच गए हैं. हरा पिस्ता, जिसका भाव पिछले साल 2,000 से 2,400 रुपये था, वह इस साल लगभग 2,800 से 3,500 रुपये प्रति किलाे तक पहुंच गया है. पिछले साल अच्छी गुणवत्ता वाले अंजीर के भाव 1,500 से 2,500 रुपये प्रति किलाे थे, जाे अब घटकर 800 से 1,500 रुपये प्रति किलाे तक आ गए हैं.
 
किशमिश मुख्य रूप से भारत का ही उत्पाद है और इसकी काफी अच्छी मांग रहती है. दीपावली के समय तासगांव और पंढरपुर के किशमिश की भारी मांग हाेती है. पिछले साल इसके दाम साधारणतः 250 से 450 रुपये प्रति किलाेग्राम तक थे, जबकि इस साल किशमिश के दाम बढ़कर 400 से 600 रुपये प्रति किलाेग्राम हाे गए हैं. काली किशमिश (काले मनुके) मुख्य रूप से अफगानिस्तान से आती है.
 
अब नई फसल की आवक शुरू हाेने के कारण इसके दाम थाेड़े नियंत्रण में आ गए हैं. हालांकि, पिछले तीन महीनाें में काली किशमिश की बहुत भारी किल्लत थी, जिसकी वजह से इसकी कीमताें में 100 से 125 प्रति किलाे की बढ़ाेतरी हुई थी. जाे काली किशमिश पिछले साल 400 से 600 रुपये प्रति किलाेग्राम के भाव पर उपलब्ध थी.