गुलटेकड़ी, 29 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) दीपावली के दौरान एक-दूसरे को गिफ्ट देने के लिए ड्राई फ्रूट्स के बॉक्स की हर साल अच्छी मांग रहती है. हालांकि, इस साल ड्राई फ्रूट्स की कीमतें बढ़ने से बॉक्स के दाम भी बढ़ गए हैं. इसके परिणाम स्वरूप कुछ ग्राहकों ने वैकल्पिक वस्तुओं और अन्य खाद्य पदार्थों की तलाश शुरू कर दी है, तो कुछ ने बॉक्स का वजन या मात्रा कम करने का फैसला किया है. वर्तमान में ईरान, सऊदी अरब और खाड़ी देशों में युद्ध शुरू होने के कारण ड्राय फ्रूट्स (सूखे मेवे) के आयात में बाधा आ रही है. इसका सीधा असर इनकी कीमतें बढ़ने पर भी पड़ा है. इसके बावजूद, दीपावली जैसा सबसे बड़ा त्योहार साल में एक ही बार आने के कारण अच्छा व्यापार होने की व्यापारियों को उम्मीद है. व्यापारियों का अनुमान है कि इस साल की दीपावली तय तारीखों यानी 6 से 12 नवंबर के बीच आई है. पिछले महीने का वेतन और दीपावली का बोनस, इस तरह की अतिरिक्त राशि लोगों के हाथों में आएगी. इसलिए दीपावली अच्छी रहेगी और आने वाले कुछ दिनों में ग्राहक खरीदारी के लिए बाजार में आएंगे.ड्राई फ्रूट के बाजार पर नजर डालें तो पिछली दीपावली की तुलना में काजू के दाम आमतौर पर 100 रुपये बढ़ गए हैं. बादाम के दाम भी बढ़ गए हैं. वहीं, पिस्ता की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं. इस वजह से गिफ्ट देने वालों का बजट ही गड़बड़ा गया है. डॉलर के रेट लगातार स्थिर बने हुए हैं, लेकिन इससे भी महंगाई बढ़ गई है. विदेश में युद्ध का असर पड़ रहा है. इसके अलावा, वहां फसलें भी अच्छी नहीं हुई हैं, फसलें प्रभावित (क्रॉप अफेक्टेड) हुई हैं. अफगानिस्तान, ईरान, इराक और अमेरिका की मुख्य फसलें युद्ध की वजह से प्रभावित हुई हैं. इनसे आयात होने वाले सामान में महंगाई है. के टैरिफ और कुछ अन्य भी उत्पादों के आयात उनकी कीमतों पर असर पड़ा दीपावली पर ड्राई फ्रूट्स गफ्ट करने का चलन है, जसमें बॉक्स पैकिंग या आकर्षक पैकिंग का बहुत महत्व होता है. उस बॉक्स में आमतौर पर बादाम, किशमिश, नमकीन पिस्ता, अंजीर, खुबानी, काली किशमिश और खजूर जैसे महत्वपूर्ण ड्राई फ्रूट्स होते हैं, जिनका आयात किया जाता है. हालांकि काजू भारत का ही है, लेकिन देश की जरूरत को पूरा करने के लिए यहां उतना उत्पादन नहीं होता. इसके अलावा, हमारे देश का काजू उच्च गुणवत्ता वाला होने के कारण उसका निर्यात किया जाता है, और बाहर के देशों से खासकर तंजानिया या दक्षिण अफ्रीका से यहां काजू की आवक होती है. इस वर्ष काजू के दाम भी सामान्यतः प्रति किलो 100 रुपये बढ़ गए हैं. व्यापारी बताते हैं कि इस साल अमरीका और ईरान में नमकीन पिस्ते की फसल पर बहुत बुरा असर पड़ा है. दोनों ही देशों में करीब 25% फसल प्रभावित हुई है. इसी वजह से पिस्ते के भाव, जो पिछले साल 1,400 से 1,800 रुपये प्रति किलो थे, इस साल बढ़कर 1,900 से 2,400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. हरा पिस्ता, जिसका भाव पिछले साल 2,000 से 2,400 रुपये था, वह इस साल लगभग 2,800 से 3,500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. पिछले साल अच्छी गुणवत्ता वाले अंजीर के भाव 1,500 से 2,500 रुपये प्रति किलो थे, जो अब घटकर 800 से 1,500 रुपये प्रति किलो तक आ गए हैं. किशमिश मुख्य रूप से भारत का ही उत्पाद है और इसकी काफी अच्छी मांग रहती है. दीपावली के समय तासगांव और पंढरपुर के किशमिश की भारी मांग होती है. पिछले साल इसके दाम साधारणतः 250 से 450 रुपये प्रति किलोग्राम तक थे, जबकि इस साल किशमिश के दाम बढ़कर 400 से 600 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं. काली किशमिश (काले मनुके) मुख्य रूप से अफगानिस्तान से आती है. अब नई फसल की आवक शुरू होने के कारण इसके दाम थोड़े नियंत्रण में आ गए हैं. हालांकि, पिछले तीन महीनों में काली किशमिश की बहुत भारी किल्लत थी, जिसकी वजह से इसकी कीमतों में 100 से 125 प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई थी. जो काली किशमिश पिछले साल 400 से 600 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर उपलब्ध थी.
दीपावली होने के कारण इस बार भी मांग अच्छी रहेगी इस साल सभी ड्रायफ्रूट्स में 5% से 10% तक दाम बढ़ गए हैं. विशेष रूप से, जो ड्रायफ्रूट्स आयात किए जाते हैं, उनमें दिक्कतें होने के कारण कीमतें बढ़ी हैं; वहीं भारत में कम बारिश होने के कारण यहाँ की फसल भी अच्छी नहीं हुई है. जो माल आ रहा है, उसे फिलहाल बहुत लंबा सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे परिवहन (ट्रांसपोर्ट) का खर्च बढ़ गया है. इसका असर बिक्री की कीमतों पर पड़ रहा है. इसके अलावा, डॉलर के रेट कम होने पर ड्रायफ्रूट्स थोड़े सस्ते होने की जो उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हुई है. चालू तारीख पर दिवाली होने के कारण डिमांड अच्छी रहने वाली है. 1 तारीख से 8 तारीख के बीच ऐसा लगता है कि ग्राहक भारी संख्या में मार्केट में दिखाई देंगे. भले ही रेट थोड़े-बहुत कम-ज्यादा हों, लेकिन त्यौहार बड़ा है और हर कोई यह त्यौहार मनाता है. इसलिए, कम-ज्यादा मात्रा में ही सही, लेकिन ग्राहक बाजार में खरीदी के लिए आएंगे ही. 8 नवंबर को दिवाली होने के कारण, पिछले महीने का वेतन (सैलरी) और चालू महीने का बोनस, ऐसे थोड़े ज्यादा पैसे लोगों के हाथों में आते हैं. इसलिए लोगों के चेहरों पर खुशी होती है और वे ज्यादा खरीदारी करते हैं, ऐसा अनुभव है. - नवीन गोयल मे. नवीन पेढी, मार्केट यार्ड
बढ़ी कीमतों के कारण ग्राहक विकल्पों की खोज में
दीवाली के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ड्राई फ्रूट गिफ्टिंग कोरोगेटेड बॉक्स के दाम पिछले साल जैसे ही हैं. लेकिन, जो प्लास्टिक और एक्रिलिक मटेरियल है, उसमें कीमतें बढ़ी हैं. इसके अलावा, ड्राई फ्रूट्स में भी महंगाई आई है. खासतौर पर, खारा पिस्ता के दाम पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुने हो गए हैं. बादाम पिछले साल की तुलना में करीब 500 रुपये प्रति किलो महंगा हुआ है. काजू 100 रुपये महंगा हुआ है, जबकि किशमिश (बेदाणा) के दाम लगभग पहले जैसे ही हैं, उसमें ज्यादा फर्क नहीं आया है. खुबानी (जर्दाळू) भी उन्हीं दामों पर मिल रही है और अंजीर की कीमतों में भी कोई खास बदलाव या बढ़ोतरी नहीं हुई है. लोग हमारे यहां से ड्राई फ्रूट बॉक्स गिफ्टिंग के लिए लेकर जाते हैं. हालांकि, बादाम और पिस्ता की बढ़ी हुई कीमतों के कारण ग्राहक विकल्प के तौर पर ग्रैनोला, मूसली या ड्राई फ्रूट चिवड़ा की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही, बादाम के विकल्प के रूप में कोटेड बादाम की मांग होती है, क्योंकि उसके दाम आम तौर पर प्रति किलो 300 रुपये कम होते हैं. इसके अलावा, पाइनएप्पल कैंडी और ड्राई कीवी की भी मांग है. इसमें सूखे जैसी स्थिति का भी थोड़ा असर है. फिलहाल, बाहरगांव के ग्राहक ड्राई फ्रूट बॉक्स के लिए कम आ रहे हैं. - गौतम नाबरिया मे. पी.एस. ट्रेडर्स, मार्केट यार्ड
ड्राई फ्रूट्स के होलसेल भाव (कीमत प्रति किलो रुपये में)
नमकीन पिस्ता 1,900 से 2,400
हरा पिस्ता 2,800 से 3,500
बादाम 1,000 से 1,500
काजू 900 से 1500
अंजीर 700 से 1,500
खुबानी (जर्दालू) 400 से 800
किशमिश 400 से 600
काली किशमिश 400 से 800