नई दिल्ली, 29 अ्नटूबर (वि.प्र.).
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाेगाें की जिंदगीभर की कमाई लूटने वालाें के खिलाफ सुप्रीम काेर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. काेर्ट ने ऐसे साइबर अपराधाें काे डिजिटल डकैती बताते हुए आराेपियाें काे जमानत देने पर भी कड़ी टिप्पणी की है. खास ताैर पर बुजुर्गाें और रिटायर्ड लाेगाें काे निशाना बनाने वाले गिराेहाें पर अदालत ने नाराजगी जताई है. इस बीच, देश में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कराेड़ाें रुपये की ठगी के आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं.
28 अक्टूबर काे चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजाें की पीठ ने डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलाें में आराेपियाें के लिए सख्त रुख दिखाया.
पीठ में जस्टिस जाॅयमाल्य बागची और जस्टिस वी माेहना भी शामिल थे. अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधाें में शामिल लाेगाें के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई हाेनी चाहिए. सुनवाई के दाैरान चीफ जस्टिस ने ट्रायल से पहले अपराधियाें काे सजा देने की बात भी कही है.
जमानत पर रिहा हाेने पर भी राेक रिपाेर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दाैरान सीजेआई ने टिप्पणी की कि अगर कानून में गुंजाइश हाे, ताे डिजिटल अरेस्ट के आराेपियाें काे मुकदमे की सुनवाई पूरी हाेने से पहले भी सजा देने के प्रावधान पर विचार किया जाना चाहिए. उन्हाेंने ये भी कहा कि माैका मिला ताे ऐसे आराेपियाें काे किसी भी अदालत से जमानत पर रिहा हाेने से राेकने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं. हालांकि, यह अदालत की माैखिक टिप्पणी है, काेई नया कानून या जमानत पर लागू हुआ पूरा बैन नहीं है.
12 राज्याें में 35 साइबर क्राइम ये मामला दाे आराेपियाें से जुड़ा था, जिनके खिलाफ 12 राज्याें में 35 साइबर अपराध के मामले दर्ज हाेने की बात सामने आई. आराेप था कि उनकी कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल कथित साइबर ठगी की रकम लेने के लिए किया गया. आराेपियाें ने इन मामलाें काे एक जगह जाेड़ने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम काेर्ट ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया.