शिवाजीनगर, 29 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) जिन परिवारों में दो बेटियां हैं, वहां सभी की काउंसलिंग (परामर्श) करते हुए बेटा-बेटी की समानता का अहसास कराया जाना चाहिए. बेटे के लिए महिलाओं पर आने वाले दबाव को कम करने के लिए पूरे परिवार की मानसिकता बदलने पर जोर दिया जाना चाहिए. यह सुझााव विधान परिषद सदस्य तथा पूर्व उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे ने दिए हैं. पीसीपीएनडीटी और एमटीपी अधिनियमों के लिए राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की अध्यक्ष और गन्ना काटने वाली महिला कामगारों की गर्भाशय सर्जरी से संबंधित समिति की अध्यक्ष के रूप में डॉ. गोर्हे े ने हाल ही में पुणे में एक समीक्षा बैठक की. इस बैठक में कानूनों के क्रियान्वयन, न्यायालयीन मामलों और गन्ना काटने वाली महिलाओं के स्वास्थ्य की समीक्षा की गई. बैठक में विधायक उमा खापरे, डॉ. संदीप सांगले, डॉ. भगवान पवार के साथ-साथ संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी और चिकित्सा अधीक्षक भी शामिल हुए. डॉ. गोर्हे ने निर्देश दिए कि नियमित जांच के साथ-साथ वाहनों या अनाधिकृत (गैर-कानूनी) स्थानों पर होने वाले अवैध लिंग परीक्षण का पता लगाया जाना चाहिए. गोपनीय जानकारी की पुष्टि करके पुलिस प्रशासन के सहयोग से डिकॉय कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा, महिलाओं से भरोसे के साथ संवाद करके ऑपरेशन के कारणों और चिकित्सीय आवश्यकता की जांच करनी चाहिए. साथ ही गर्भपात से पहले और बाद में महिलाओं की संवेदनशील तरीके से काउंसलिंग करके परिवार नियोजन के विकल्पों की जानकारी दी जानी चाहिए.