रेडियो ब्रह्मांड में एक फीनिक्स ब्रह्मांड

आईसर पुणे व NCRA-TIFR के खगोलविदो ने विशाल रेडियो गैलेक्सी खोजा

    31-Oct-2026
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पाषाण, 30 अक्टूबर (आ.प्र.)

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान अर्थात आईसर पुणे और नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स-टाटा फंडामेंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट अर्थात एनसीआरए-टीआईएफआर के खगोलविदों ने पहली ऐसी रेडियो दीर्घिका की खोज की है, जो जेट गतिविधि के 4 अलग-अलग चरणों के प्रमाण दिखाती है. इसके विपरीत, आज तक ज्ञात हजारों रेडियो गैलेक्सी में से अधिकांश केवल एक बार ही सक्रिय प्रतीत होती हैं. पीएचडी के छात्र पवन खाडेकर , प्रो. धर्म वीर लाल और प्रो. रमना अत्रेय की टीम ने, द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुए एक शोधपत्र में इस खोज की जानकारी दी है. खाडेकर के पीएचडी शोध के मार्गदर्शक प्रो.रमना अत्रेय ने बताया कि खाडेकर असामान्य संरचना वाली रेडियो दीर्घिका का अध्ययन कर रहे थे, लेकिन यह विशेष खोज पूरी तरह से अप्रत्याशित थी. मुझे वेिशास नहीं हुआ था कि यह दीर्घिका अपने चौथे जीवन में है. इसके पुख्ता सबूत जुटाने में थोड़ा समय लगा. पवन ने भारत में स्थित जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (जीएमआरटी) के अपने उच्च-गुणवत्ता वाले डेटा और अमेरिका में वेरी लार्ज एरे तथा दक्षिण अफ्रीका में मीरकट के अभिलेखीय डेटा का उपयोग किया. पवन ने कहा, कई रेडियो टेलीस्कोप दुनिया भर के शोधकर्ताओं को अपना डेटा स्वतंत्र रूप से प्रदान करते हैं. जीएमआरटी एक वेिशस्तरीय, कम आवृत्ति वाला रेडियो टेलीस्कोप है. जिसे टाटा फंडामेंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक इकाई, नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स द्वारा बनाया और संचालित किया जाता है. एनसीआरए-टीआईएफआर के प्रो. ओबेरोई ने टिप्पणी की, रेडियो गैलेक्सी से जुडी घटनाएं अपनेआप में दिलचस्प हैं; वे ब्रह्मांड की उत्पत्ति के कुछ मौलिक प्रश्नों की जांच करने के लिए जांच-पड़ताल के साधन भी हैं. जीएमआरटी की कल्पना भारतीय खगोलविदों को उच्चतम स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद करने के लिए और ब्रह्मांड को समझने की वैेिशक खोज में भारत के योगदान के रूप में की गई थी. इस शोध को भारत सरकार द्वारा दिए गए अनुदान के माध्यम से समर्थन मिला था.