जो गुण आपको पसंद आए, वो आपको मिल जाएगा

    31-Oct-2026
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gfgv
दूसरों के गुणों को देखकर उन गुणों को पाने की इच्छा अगर आप करते हैं, तो आप भी गुणवान बन जाते हैं. किसी भी व्यक्ति को देखिए, उसमें जो गुण है, उस गुण को पकड़ लीजिए और वह गुण आपको पसंद आ जाए तो वह गुण आपको भी मिल जाएगा. दोष खटके, तो गए- गुण अच्छे लगे, तो मिले - यह सूत्र है. हालांकि हम लोग, कई तरह के वहमों के शिकार होते हैं. एक वहम हमें यह होता है कि मैं दूसरों के गुण देखता हूं; मैं गुणानुरागी हूं. कई बार यह सच भी होता है, लेकिन अयादातर यह एक वहम होता है, एक भ्रम होता है. यह कैसे है, वह समझाता हूं. आप कहते हैं कि अमुक व्यक्ति बहुत अच्छा है. वह व्यक्ति आपको क्यों अच्छा लगता है? क्योंकि वह आपका साथ देता है कि आप बहुत अच्छे हैं. वह आपके अहंकार को सहलाता है, इसलिए वह व्यक्ति आपको अच्छा लगता है. आप कहेंगे कि वाह! यह तो बहुत गुणवान आदमी है. यदि आप ऐसा मानते हैं कि यह आपका गुणानुराग है, तो आप भूल कर रहे हैं. उस व्यक्ति जैसे या उससे भी बढ़कर गुण पास वाले में होंगे, तो भी वहां आपकी नजर नहीं जाएगी; इसी व्यक्ति पर नजर जाएगी. यह गुणानुराग हुआ, या व्यक्तिराग हुआ और व्यक्तिराग के पीछे भी क्या है? आपके अहंकार का राग. यानी गुण का राग हुआ या अहंकार का राग हुआ? वैसे तो श्रावक का कोई दुश्मन होता ही नहीं, लेकिन मान लीजिए कि अज्ञानतावश आप किसी को अपना शत्रु मान लेते हैं. उसके भीतर भी गुण हैं, तो क्या वे गुण आपको दिखाई देंगे या नहीं? दो हजार का नोट अगर कचरे के ढेर में पड़ा हो... कोई भिखारी उसे देखे, तो वह यह नहीं देखता कि वह कचरे के ढेर में पड़ा है. वह सिर्फ उसका मूल्य देखता है. उसकी दृष्टि दो हजार के नोट पर होती है. वह नोट कहां पड़ा है, यह वह नहीं देखता. इसी तरह यदि आपकी नजर गुण पर हो, तो फिर गुण किसमें है, यह देखने की जशरत नहीं होती. आपको गुण चाहिए; तो फिर वे गुण किसी में भी हों - दुश्मन में ही क्यों न हों - तो भी आपको उन गुणों के प्रति अनुराग हो जाएगा. इसे कहते हैं गुणानुराग. - श्री यशोविजयजी म. सा.