धर्म से जुड़ने पर घटने लगती हैं इच्छाएं: अभिषेक मुनिजी

    05-Oct-2026
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कोथरुड, 4 अक्टूबर (आ. प्र.)

श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान में विराजित गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी ने कहा कि, आधुनिक युग में तो भौतिक सुख-सुविधाओं का विस्तार निरंतर बढ़ता जा रहा है, लेकिन इन सबके बावजूद मनुष्य के जीवन में शांति और संतोष का अभाव दिखाई देता है. परमात्मा ने अपने संदेश में बताया है कि देव जगत का अपार वैभव और सुख-सुविधाएं भी इस आत्मा ने न जाने कितनी बार प्राप्त की हैं. पारिवारिक जीवन, पुत्र, मित्र तथा विभिन्न सांसारिक रिश्ते भी जन्म-जन्मांतर से मिलते रहे हैं. संसार की सुख-सुविधाएं और वैभव बार-बार प्राप्त हो सकते हैं, लेकिन इस आत्मा को धर्म की प्राप्ति अत्यंत दुर्लभ है. धर्म का मिलना सहज नहीं, बल्कि अत्यंत कठिनता से प्राप्त होने वाला सौभाग्य है. मनुष्य जन्म मिल जाना भी अपने-आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन मनुष्य जन्म के साथ मानवता और इंसानियत का जागृत होना उससे भी अधिक दुर्लभ है. वास्तविक मनुष्य वही है, जिसके भीतर करुणा, संवेदना, सद्भाव, संयम और धर्म की भावना जागृत हो. पहले मनुष्य के पास साधन कम थे, फिर भी वह अपेक्षाकृत शांति से जीवन जीता था. आज साधनों की कोई कमी नहीं है, सुविधाएं बढ़ती जा रही हैं, लेकिन मनुष्य के पास न समय है और न ही मानसिक शांति. जब व्यक्ति धर्म से जुड़ता है, तब उसे अपने जीवन में मिले समय और अवसर का महत्व समझ में आने लगता है. वह अपने समय का सदुपयोग करना सीखता है. यदि जीवन में एक बार धर्म का संपर्क हो जाए और सद्गुरु की प्राप्ति हो जाए, तो सद्गुरु व्यक्ति को धर्म से जोड़कर उसकी दिशा बदल देते हैं.जीवन की वास्तविक सफलता अधिक से अधिक सुख-सुविधाएं जुटाने में नहीं, बल्कि धर्म, सद्गुरु और आत्मचिंतन से जुड़कर जीवन को सार्थक बनाने में है.
 
गुरुदेव श्री अभिषेक मुनि विभिन्न उपाधियों से अलंकृत

उपप्रवर्तक गुरुदेव श्री अभिषेक मुनि जी का 60वें जन्मोत्सव उपलक्ष्य में वाचनाचार्य गुरुदेव डॉ. श्री विशाल मुनि जी ने गुरु निहाल परिवार की ओर से गुरुदेव श्री अभिषेक मुनि जी के ‌‘स्थितप्रज्ञ‌’ की उपाधि से अलंकृत किया. स्थानीय संघ की ओर से गुरुदेव को ‌‘बहुश्रुत‌’ की उपाधि प्रदान की गई, वहीं बासमती युवक मंडल द्वारा उन्हें ‌‘आगम वेत्ता‌’ की उपाधि से विभूषित कर उनके चरणों में श्रद्धा एवं सम्मान अर्पित किया गया.