तिरुवनंतपुरम, 4 अ्नटूबर (वि.प्र./वार्ता)
पीडब्ल्यूडी इंजीनियर आत्महत्या मामले में ज्ञानेशकुमार की मुश्किलें बढ़ रही हैं. राेड के काम में कराेड़ाें की रिश्वत मांगने का आराेप था. केरलम सरकार ने 2006 के पुराने मामले में फिर से जांच करने के आदेश दे दिए हैं. उस समय ज्ञानेशकुमार राज्य में सचिव थे, राेड बनाने के 215 कराेड़ के काम में कराेड़ाें की रिश्वत मांगी थी.
मलेशियाई सिविल इंजीनियर ने टेंशन में आकर आत्महत्या कर ली थी. जांच में लीपापाेती कर ज्ञानेशकुमार काे बचा लिया गया था.
अब नए सिरे से फाइल फिर से खुलेगी. केरल के गृह मंत्रालय ने 2006 में वर्क्स सेक्रेटरी के ताैर पर काम कर रहे ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विजिलेंस ब्यूराे की शुरुआती जांच से जुड़ी फाइलें तलब की हैं. दरअसल, विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूराे ने 20 साल पहले एक मलेशियाई सिविल इंजीनियर की आत्महत्या के बाद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शुरुआती जांच की थी.
एक रिपाेर्ट के हवाले से बताया कि केरल के गृह मंत्रालय ने ली सी बीन की आत्महत्या के बाद शुरू हुई जांच से जुड़ी फाइलें मांगी हैं. ली सी बीन पीटीआई- बीईएल के चीफ प्राेजेक्ट मैनेजर थे. पीटीआई-बीईएल एक इंडाे-मलेशियाई कंसाेर्टियम है, जाे अरबाें डाॅलर के केरल स्टेट ट्रांसपाेर्ट प्राेजेक्ट के तहत एमसी राेड काे अपग्रेड करने में शामिल था. ली ने कुआलालंपुर में आत्महत्या कर ली. चर्चाएं थीं कि सरकारी अधिकारियाें ने बिल पास करवाने की उनकी काेशिश काे राेक दिया था.
1998 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार का भी नाम ली के सुसाइड नाेट में आया था. इसमें ली ने प्राेजेक्ट काे लागू करने काे लेकर फैले भ्रष्टाचार पर भी लिखा था. उस समय की एलडीएफ सरकार ने इस मामले में विजिलेंस जांच बैठा दी थी. हालांकि, बाद में विजिलेंस की जांच रुक गई थी.