सत्य को समझकर सत्याग्रही बनें : प्रशांतरत्न विजयजी
सोलापुर में नवकार महामंत्र की नवदिवसीय साधना ‘कुसुमांजलि’ सम्पन्न
05-Oct-2026
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सोलापुर, 4 अक्टूबर (आ. प्र.)
श्री आदेीशरजी जैन ेशेतांबर मंदिर, जोडभावी पेठ में प्रवचनकार पू. मुनि श्री प्रशांतरत्न विजयजी एवं साध्वीजी श्री संयमलीना श्री जी म. के पावन सान्निध्य में नवदिवसीय नवकार महामंत्र की अखंड भाष्य जाप एवं नवकार तप की भव्य आराधना चल रही है, जिस में 400 से अधिक श्रावक-श्राविका जुड़े हुए हैं. उसमें भव्य नवकार पीठिका की रचना, शणगार, कुसुमांजलि का भव्य अनुष्ठान रविवार (4 अक्टूबर) को संपन्न हुआ. इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रशांतरत्न विजयजी ने कहा कि, कदाग्रही नहीं बनना चाहिए, सत्य को समझकर हमेशा सत्यग्राही बनना चाहिए. कई लोग आग्रही होते हैं. इसके कारण न तो वे दुनिया में यशस्वी बनते हैं और न तो वे हितैषी बनकर अपने आत्मा का हित कर सकते हैं. आग्रह के भी अनेक प्रकार हैं. कोई कदाग्रही होते हैं तो कोई हठाग्रही होते हैं, कोई पूर्वग्राही होते हैं तो कोई सत्य के आग्रही होते हैं. कदाग्रही और हठाग्रही लोग जीवन में, और आत्म-विकास में आगे नहीं बढ़ सकते. जीवन में आध्यात्मिक विकास को पाने के लिए सत्यग्राही बनना चाहिए. जो सत्य तत्त्व को स्वीकार करता है वह ही व्यक्ति सत्य तत्त्व को समझने के लिए तत्पर बनता है और सत्य की समझ जैसे-जैसे प्राप्त होती है, वह सत्य को स्वीकार करे बिना नहीं रहता. सत्य को समझने और सत्य को स्वीकार करने के लिए व्यक्ति में योग्यता-पात्रता चाहिए. कदाग्रह और पूर्वग्रह को जो व्यक्ति छोड़ सकता है, वही सभी लोगों के साथ उचित व्यवहार और वर्तन कर सकता है. - मुनि प्रशांत रत्न विजयजी श्री आदेेशर जैन ेशेतांबर मंदिर, ट्रस्ट, सोलापुर