गांधी को नई पीढ़ी तक पहुंचाना बड़ी चुनौती

कोथरुड में महाराष्ट्र गांधी स्मारक निधि व युवा क्रांति दल के कार्यक्रम मेंवरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अमरीश मिश्र ने कहा

    05-Oct-2026
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bdg
कोथरुड, 4 अक्टूबर (आ.प्र.)

महात्मा गांधी ने देश को चेतना दी और एक अद्भुत जनशक्ति बनाई. हालांकि, गांधी को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज बड़ी चुनौती है. अगर हमें नई पीढ़ी को गांधी के बारे में समझाना है. गांधी के विचार सिर्फ सत्य और अहिंसा तक सीमित नहीं हैं. नई पीढ़ी को सत्य, अहिंसा और उनके दूसरे मूल्यों का बड़ा मतलब समझाने की जशरत है,यह विचार वरिष्ठ पत्रकार और लेखक अंबरीश मिश्र ने व्यक्त किए. महाराष्ट्र गांधी स्मारक निधि और युवा क्रांति दल ने 1 से 7 अक्टूबर तक कोथरूड के गांधी भवन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सप्ताह का आयोजन किया है. सप्ताह का उद्घाटन अंबरीश मिश्र के ‌‘एक थेंब गांधी‌’ पर व्याख्यान के साथ हुआ. इस मौके पर डॉ. शिवाजीराव कदम, ट्रस्टी अनवर राजन, लक्ष्मीकांत देशमुख, प्रवीण सप्तर्षि, अभय छाजेड, डॉ. एम.एस. जाधव, रमेश आढाव मौजूद थे. इस मौके पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के शहर अध्यक्ष विशाल तांबे, यशवंतराव मोहिते कॉलेज की प्रिंसिपल प्रतिभा गायकवाड़, युवक क्रांति दल के अप्पा अनारसे, प्रशांत कोठडिया, तेजस भालेराव, सूरज कुलकर्णी, सचिन चौहान, रवींद्र धनक, चंद्रकांत जाधव मौजूद थे. मिश्र ने कहा, मैं गांधीवादी कार्यकर्ता का बहुत सम्मान करता हूं. लेकिन गांधी के तत्वज्ञान को समझना मुश्किल है, क्योंकि हमने उनके तत्वज्ञान का ठीक से अध्ययन और अनुभव नहीं किया है. गांधी सिर्फ अध्ययन का विषय नहीं हैं, बल्कि अनुभव का भी विषय हैं. महात्मा गांधी लोगों के बीच रहे और समाज की कई पीढ़ियों का निर्माण किया. उन्हें समझने के लिए उनका मूल गुजराती साहित्य पढ़ना जरूरी है. लोगों के गुणों को पहचानने और उन्हें उचित जिम्मेदारी देने का गांधी का तरीका अनोखा था. आम आदमी उनसे खुले मन से बातचीत कर सकता था. आज समाज में नागरिक और लोगों के बीच टकराव है. जाति, धर्म के आधार पर सामाजिक माहौल गर्म हो रहा है, जिससे अस्थिरता पैदा हो रही है| मिश्रा ने कहा कि समाज में असमानता का नतीजा आखिरकार शासकों को ही भुगतना पड़ता है.