तानाशाह को उखाड़ फेकने तक हम चुप नहीं बैठेगे

मुंबई के "गर्जना मोर्चा" में उद्धव ठाकरे ने मोदी-अमित शाह, ज्ञानेशकुमार के खिलाफ हुंकार भरी

    05-Oct-2026
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MumbaiMorcha
मुंबई, 4 अ्नटूबर (वि.प्र./वार्ता)
तानाशाह काे उखाड़ फेंकने तक हम चुप नहीं बैठेंगे. यह प्रतिपादन रविवार काे उद्धव ठाकरे ने किया. उन्हाेंने मुंबई के ‘गर्जना माेर्चा’ में माेदी-अमित शाह, ज्ञानेशकुमार के खिलाफ हुंकार भरते हुए कहा.
 
इस माैके पर राज ठाकरे व अघाड़ी के साथ निकाले विशाल माेर्चे में बरसते हुए कहाज्ञानेशकुमार काे अब इस्तीफा देना ही हाेगा. उन्हें उनके कर्माें की सजा मिलनी ही चाहिए. उन्हाेंने कहाजब राष्ट्रपति का चुनाव हाेता है, ताे फिर चुनाव आयु्नत का क्यों नहीं? वाेट चाेरी-सरकार चाेरी के बाद राम मंदिर के तिजाेरी पर भी डाका डाला गया. उन्हाेंने कहा- अब जनता के सब्र का बांध टूट रहा है. अब इनका सड़काें पर चलना कठिन हाेगा.
 
उन्हाेंने आराेप लगाते हुए कहा- महाराष्ट्र में 2 कराेड़ देश मेें 13 कराेड़ नाम काट दिए गए. नियमाें काे ताक पर रख ज्ञानेशकुमार काे मुख्य चुनाव आयु्नत बनाया गया. वहीं दूसरी ओर राज ठाकरे ने कहा-तत्काल एसआईआर रद्द हाे, ज्ञानेशकुमार तत्काल कुर्सी छाेड़ें और बैलेट से चुनाव कराए जाएं. अब देश की जनता सरकार चुनेगी. इस विशाल माेर्चे के बीच ‘वाेट चाेर-गद्दी छाेड़’ तथा चुनाव आयाेग हटाओ-देश बचाओ के नारे भी गूंजते रहे. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रविवार काे मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने जाॅइंट प्रदर्शन किया.
 
प्रदर्शन में हजाराें लाेग शामिल हुए. दाेनाें नेताओं ने मेट्राे स्टेशन से शुरू हाेकर महानगरपालिका भवन तक मार्च निकाला. उद्धव की शिवसेना यूबीटी और राज ठाकरे की मनसे पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आराेप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में हुए एसआईआर काे रद्द किया जाए. सरकार किसकी बनेगी, ये फैसला जनता काे तय करना है, चुनाव आयाेग काे नहीं. वहीं उद्धव बाेले कि ज्ञानेश कुमार बीजेपी का हथियार हैं. हमारी मांग है कि महाराष्ट्र में की गई पूरी एसआईआर प्रक्रिया रद्द की जाए. कानून के मुताबिक, एसआईआर किसी आपात स्थिति में की जाती है. विधानसभा चुनाव के दाैरान 40 से 60 लाख मतदाताओं के नाम जाेड़े गए और इसके जरिए सत्ता हासिल की गई. उन्हाेंने कहा- पहले एक समिति हाेती थी, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता शामिल हाेते थे.