मुंबई, 5 अ्नटूबर (वि.प्र.)
अल नीनाे के प्रभाव के कारण राज्य में संभावित सूखे जैसी स्थिति पैदा हाेने की पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने उपलब्ध जल भंडार का किफायती और याेजनाबद्ध तरीके से प्रबंधन करने के सख्त निर्देश दिए हैं.
राज्य में उपलब्ध जल भंडार का 31 अगस्त 2027 तक नियाेजन करने का शासन आदेश (जीआर) जारी किया गया है. इसके अनुसार सभी मनपाओं, नगर पालिकाओं, नगर पंचायताें, ग्राम पंचायताें और अन्य स्थानीय निकायाें काे 16 अक्टूबर 2026 से पानी के उपयाेग में कम से कम 10 प्रतिशत की कटाैती करने के निर्देश दिए गए हैं. राज्य में उपलब्ध पानी अगले एक साल तक पूरा हाे सके, इसके लिए आवश्यकतानुसार इस कटाैती काे और बढ़ाने के अधिकार संबंधित जिलाधिकारियाें काे दिए गए हैं.
इस बीच, वर्ष 2026 के खरीफ सीजन में ट्रिगर-1 लागू हाेने वाले 265 तालुकाें में सूखा घाेषित किया गया है. सरकारी आदेश के अनुसार राज्य के प्रमुख बांधाें, जलाशयाें और अन्य जल स्राेताें में उपलब्ध पानी का उपयाेग निश्चित प्राथमिकताओं के आधार पर करना हाेगा.
इसमें पीने के पानी काे सर्वाेच्च और पहली प्राथमिकता दी गई है. पीने के पानी की आवश्यकता 31 अगस्त 2027 तक सुरक्षित रहे, इस प्रकार बांधवार जल भंडारण का नियाेजन करने के निर्देश दिए गए हैं. इसमें वाष्पीकरण, बांध में जमा गाद तथा अनधिकृत पानी के दाेहन पर भी विचार करने काे कहा गया है.
इसके अलावा, प्रत्येक प्रमुख जलाशय के उपलब्ध जीवित जल भंडार में से कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा अतिरिक्त बफर या आपातकालीन स्टाॅक के रूप में आरक्षित रखना हाेगा. इस बफर स्टाॅक का सामान्य उपयाेग नहीं किया जा सकेगा. अप्रत्याशित वर्षा की कमी, लंबे समय तक शुष्क अवधि या अन्य आपातकालीन स्थितियाें में केवल अनिवार्य रूप से पीने के पानी के लिए ही इसका उपयाेग करने के निर्देश हैं. स्थानीय निकायाें काे पानी का रिसाव (लीकेज) कम करने के लिए विशेष अभियान चलाने के आदेश दिए गए हैं.
नागरिकाें में जल संरक्षण के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने के साथ-साथ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का पूरी क्षमता से उपयाेग करने काे कहा गया है. शाेधित (ट्रीटेड) पानी का उपयाेग सार्वजनिक पार्काें, बगीचाें, डिवाइडराें और अन्य हरित क्षेत्राें के लिए करने काे प्राथमिकता दी जाए. साथ ही निर्माण कार्य, औद्याेगिक प्रक्रियाओं, धुलाई और अन्य गैर-पेय कार्याें के लिए शाेधित पानी का उपयाेग बढ़ाने के निर्देश हैं.
जिन जलाशयाें में जीवित जल भंडार पूरी तरह समाप्त हाे गया है या पीने के पानी के लिए अपर्याप्त है, वहां बांध की संरचनात्मक सुरक्षा, पानी की गुणवत्ता और तकनीकी व्यवहार्यता की जांच करके मृत भंडार (डेड स्टाेरेज) के पानी का उपयाेग करने की संभावना तलाशने के भी निर्देश दिए गए हैं. औद्याेगिक क्षेत्र काे भी पानी के उपयाेग में किफायत बरतने के निर्देश दिए गए हैं. प्रत्येक संबंधित उद्याेग अपने कुल पानी के उपयाेग का कम से कम 30 प्रतिशत पानी रीसाइकल या पुनर्चक्रण करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा विकसित करे, ऐसा शासन आदेश में उल्लेख किया गया है. जिन कार्याें के लिए शाेधित पानी का उपयाेग किया जा सकता है, वहां पीने याेग्य पानी का उपयाेग कम करने के उपाय करने के निर्देश उद्याेगाें काे दिए गए हैं.