पृथ्वी पर जो प्रेम है, परलोक में वही परमात्मा है

    06-Oct-2026
Total Views |

Prem 
एक संध्या किसी नगर से एक अर्थी निकल रही थी. बहुत लाेग उस अर्थी के साथ थे. और काेई राजा नहीं, बस एक भिखारी मर गया था. जिसके पास कुछ भी नहीं था, उसकी विदा में इतने लाेगाें काे देख सभी आश्चर्य चकित थे. एक बड़े भवन की नाैकरानी ने अपनी मालकिन काे जाकर कहा कि किसी भिखारी की मृत्यु हाे गई है और वह स्वर्ग गया है.
 
मालकिन काे मृतक के स्वर्ग जाने की इस अधिकारपूर्ण घाेषणा पर हंसी आई और उसने पूछा: ‘‘्नया तूने उसे स्वर्ग में प्रवेश पाते देखा है?’’ वह नाैकरानी बाेली: ‘‘निश्चय ही मालकिन! यह अनुमान ताे बिलकुल ही सहज है, क्योंकि जितने भी लाेग उस अर्थी के साथ थे, वे सभी फूट-फूटकर राे रहे थे. ्नया यह तय नहीं है कि मृतक जिनके बीच था, उन सब पर ही अपने प्रेम के चिह्न छाेड़ गया है?’’ प्रेम के चिह्न- मैं भी साेचता हूं, ताे दीखता है कि प्रेम के चिह्न ही ताे प्रभु के द्वार की सीढ़ियां हैंं.
 
प्रेम के अतिर्नित परमात्मा तक जाने वाला मार्ग ही कहां है? परमात्मा काे उपलब्ध हाे जाने काे इसके अतिर्नित और ्नया प्रमाण है कि हम इस पृथ्वी पर प्रेम काे उपलब्ध हाे गये. पृथ्वी पर जाे प्रेम है, परलाेक में वही परमात्मा है.