पुणे, 6 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) फाउंटेन पेन प्रेमियों और संग्राहकों के लिए एक विशेष जर्नल, ‘माय पेन कम्पैनियन ए जर्नल फॉर पेन एंथुजियास्ट्स’ पुणे में लॉन्च किया गया, जो भारत में अपनी तरह का पहला जर्नल है. इस जर्नल का विमोचन प्रसिद्ध फाउंटेन पेन संग्राहक, शिक्षाविद और फोटोग्राफर प्रो. वाई.डी. पिटकर ने किया. इसका अनावरण पेलिकन हब के पुणे मिलन समारोह में किया गया. इस आयोजन का संयोजन ‘पेलिकन हब मास्टर- पुणे’ सुरेन्द्र करमचंदानी द्वारा किया गया. वीनस ट्रेडर्स/ राइटिंग वंडर्स द्वारा विकसित, इस जर्नल को 520 व्यक्तिगत रूप से क्रमांकित प्रतियों के सीमित संस्करण के रूप में प्रकाशित किया गया है. 520 की संख्या वीनस ट्रेडर्स की 52 वर्षों की यात्रा का प्रतीक है. पेलिकन हब फाउंटेन पेन प्रेमियों और संग्राहकों का वार्षिक वैेिशक वार्षिक आयोजन है, इसमें विभिन्न शहरों और देशों से हजारों प्रेमी भाग लेते हैं. पुणे के इस मिलन समारोह ने पेन प्रेमियों को अपने अनुभवों व ज्ञान का आदान-प्रदान करने और अपने संग्रह को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया. इस वर्ष के आयोजन के लिए पेलिकन द्वारा बनाई गई एक विशेष शिमरिंग स्याही भी प्रतिभागियों को सैंपल के रूप में पेश की गई. वीनस ट्रेडर्स के सुरेन्द्र करमचंदानी ने बताया कि, जर्नल का विचार एक डायरी में पेन को समर्पित कुछ पन्नों से आया था. एक पेन प्रेमी की पूरी यात्रा को दर्ज करने के लिए एक समर्पित जर्नल बनाने का विचार इसी साधारण सोच से विकसित हुआ. इस जर्नल को पेन प्रेमियों और संग्राहकों द्वारा साझा किए गए सुझावों और अनुभवों के आधार पर आगे विकसित किया गया. यह पेन, स्याही, लिखने के अनुभव, रखरखाव और संग्रह के बारे में विवरण दर्ज करने के लिए जगह प्रदान करता है. उन्होंने कहा विशेष लेखन पत्र का चयन भी इस जर्नल को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण पहलू था. प्रो. पिटकर ने कहा फाउंटेन पेन केवल लिखने का एक साधन नहीं है; यह इसका उपयोग करने वाले व्यक्ति के साथ एक अनोखा रिश्ता बनाता है. डिजिटल युग में, फाउंटेन पेन से लिखना ठहरने, हाथ से लिखने का आनंद लेने और लिखने के अनुभव की सराहना करने का अवसर प्रदान करता है.प्रो. पिटकर ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद और आईआईटी खड़गपुर सहित विभिन्न संस्थानों में फाउंटेन पेन डिजाइन पर कार्यशालाएं और व्याख्यान आयोजित की हैं.