भक्तामर : भक्ति से विेशेशकल्याण की ओर एक सामूहिक संकल्प

    08-Oct-2026
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जैन धर्म के सर्वाधिक प्रभावशाली स्तोत्रों में ‌‘भक्तामर स्तोत्र‌’ का विशेष स्थान है. आचार्य मानतुंग स्वामी द्वारा रचित इस स्तोत्र के 48 काव्य जैन समाज में श्रद्धा, साधना और आत्मबल के प्रतीक माने जाते हैं. परंपरा के अनुसार, विपरीत परिस्थितियों में कारागार में रहते हुए आचार्य मानतुंग ने भगवान आदिनाथ की भक्ति में इसका सृजन किया. आज भक्तामर का पाठ भारत सहित वेिश के अनेक देशों में श्रद्धा और आस्था के साथ किया जाता है. 48 काव्य और 48 मिनट की सामायिक जैन साधना के बीच एक सुंदर आध्यात्मिक सामंजस्य दिखाई देता है. 48 काव्यों का पाठ साधक को भक्ति के साथ आत्मचिंतन, संयम और सकारात्मकता की ओर ले जाने वाला माना जाता है. इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 9 अक्टूबर 2026 को सुबह 9 बजकर 9 मिनट 9 सेकंड पर ‌‘भक्तामर स्तोत्र‌’ के सामूहिक पाठ का आह्‌‍वान किया गया है. 9 के अंक को अखंडता और पूर्णता के भाव से जोड़ते हुए यह आयोजन परिवार, समाज, राष्ट्र और वेिश की अखंडता का संदेश देगा. आज जब दुनिया जल-संकट, पर्यावरणीय असंतुलन, तनाव और अनेक सामाजिक चुनौतियों से गुजर रही है, तब सामूहिक प्रार्थना के साथ सेवा, संयम और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प भी आवश्यक है. जैसे बूंद-बूंद से बादल बनते हैं, वैसे ही एक-एक भक्त का पाठ सामूहिक शुभभावना का आधार बन सकता है. इस अवसर पर भावना है कि भक्तामर केवल पाठ का विषय न रहे, बल्कि आत्मशांति, सामाजिक सद्भाव, करुणा और वेिशकल्याण की प्रेरणा बने. एक समय, एक पाठ, एक भावना - वेिश कल्याण. आचार्य 108 डॉ. श्री प्रणामसागरजी महाराज  
 
पुणे में 9 अक्टूबर को गूंजेगा ‌‘भक्तामर स्तोत्र‌’ का सामूहिक स्वर

 ‌‘भक्तामर आगाज-2‌’ के माध्यम से शुक्रवार (9 अक्टूबर) को आध्यात्मिक जन-जागरण अभियान का आयोजन किया जा रहा है. इस अवसर पर प्रातः 9:09:09 बजे किसानों के कल्याण, जनजागरण और वेिश शांति की मंगल भावना के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ भक्तामर स्तोत्र का सामूहिक पाठ करेंगे, ऐसी जानकारी आयोजक भक्तामर प्रभावना चातुर्मास कमिटी एवं सकल जैन समाज पुणे के सदस्यों ने दी. यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में एकता, सकारात्मकता, संस्कार और जन-जागरण का संदेश देने का प्रयास है. देश के विभिन्न हिस्सों में वर्षा की कमी, सूखे जैसी परिस्थितियों और किसानों के सामने उत्पन्न चुनौतियों को देखते हुए यह सामूहिक प्रार्थना किसानों के कल्याण एवं कार्यसिद्धि, व्यापार-वृद्धि, युवा पीढ़ी में संस्कार एवं सकारात्मक चेतना तथा वेिश शांति की मंगल भावना को समर्पित की गई है.