मुंबई, 7 अक्टूबर (वि.प्र.)
बाॅम्बे उच्च न्यायालय ने बुधवार काे कहा कि महाराष्ट्र लाेक सेवा आयाेग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विराेध प्रदर्शन कर रहे छात्र असामाजिक तत्व नहीं हैं और इस बात पर जाेर दिया कि राज्य सरकार काे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भर्ती परीक्षाएं निष्पक्ष और अनियमितताओं के बिना आयाेजित की जाएं.
अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ित छात्राें काे विराेध करने का अधिकार है, साथ ही उनसे आग्रह किया कि वे अपनी पढ़ाई पर लाैट आएं क्याेंकि अदालत उनकी शिकायताें की जांच कर रही है. मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने कहा कि सरकार काे छात्राें काे आश्वस्त करना हाेगा कि परीक्षाएं निष्पक्ष, न्यायसंगत तरीके से और बिना किसी अनुचित आचरण के आयाेजित की जाएंगी. हाई काेर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्राें काे आंदाेलन करने का अधिकार है. अदालत एमपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा से संबंधित अन्य विवादाें काे लेकर शहर में छात्राें और अन्य लाेगाें द्वारा चल रहे आंदाेलन के खिलाफ पुणे निवासियाें द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
पीठ ने कहा कि सरकार काे परीक्षा प्रणाली में लाेगाें, विशेषकर छात्राें का विश्वास बहाल करने के लिए ईमानदारी से प्रयास करने चाहिए्.अदालत ने कहा, अगर उन्हें (छात्राें काे) अवसर नहीं मिलता और उन्हें लगता है कि कुछ गड़बड़ी हुई है, ताे उन्हें विराेध करने का अधिकार है. क्याेंकि उन्हाेंने पढ़ाई में घंटाें बिताए हैं. राज्य सरकार की ओर से पेश हुए एडवाेकेट जनरल मिलिंद साठे ने कहा कि अधिकारियाें ने उचित संयम दिखाया है और प्रदर्शनकारियाें के खिलाफ काेई एफआईआर दर्ज नहीं की है. साठे ने कहा, उनकी मांगाें में से एक एमपीएससी अध्यक्ष का इस्तीफा था. प्रक्रिया के अनुसार राज्यपाल काे एक सिफारिश भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई का इंतजार है. प्रदर्शनकारियाें के खिलाफ मामला दर्ज न करने के सरकार के फैसले की सराहना करते हुए अदालत ने कहा, प्रदर्शनकारी छात्र हैं. वे असामाजिक तत्व नहीं हैं.