एक रिश्ते में स्वतंत्रता हो तभी प्रेम सुंदर होता है !

    08-Oct-2026
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Osho
यदि तुम किसी स्त्री अथवा किसी पुरुष के साथ प्रेम में पड़ते हाे, ताे तुम मुसीबत में पड़ने जा रहे हाे. वहां ईर्ष्या हाेने जा रही है, अथवा वहां काेई और चीज हाेने जा रही है. तुम मुसीबत में पड़ने वाले हाे.
 
तुम प्रारंभ ही से उस व्यक्ति पर अधिकार जमाना शुरू कर देते हाे जिससे वहां किसी भी गलत चीज हाेने की संभावना न रहे और जाे तुम्हारे नियंत्रण के बाहर हाे. तुम उस स्त्री अथवा उस पुरुष काे नष्ट करना शुरू कर दाेगे. तुम उसे स्वतंत्रता देना बंद कर दाेगे. तुम उस स्त्री काे सभी ओर से दबाना और उसके लिए सभी दरवाजे बंद करना शुरू कर दाेगे.
 
वह स्त्री सुंदर थी, क्याेंकि वह स्वतंत्र थी. स्वतंत्रता सुंदरता में एक बहुत बड़ा तत्व है, जब तुम आकाश में स्वतंत्रता से उड़ता हुआ काेई पक्षी देखते हाे, ताे वह एक अलग तरह का पक्षी हाेता है, लेकिन जब तुम उसी पक्षी काे एक पिंजरे में बंद देखते हाे, ताे वह िफर वैसा ही नहीं रह जाता. आकाश में स्वतंत्रता से उड़ते हुए पक्षी का एक अपना अलग साैंदर्य हाेता है. वह जीवंत और स्वतंत्र हाेता है. पूरा आकाश उसका अपना हाेता है.
 
वही पक्षी पिंजरे में कुरूप हाे जाता है. उसकी स्वतंत्रता जाती रही, उसके लिए आकाश चला गया. अब उसके वे पंख व्यर्थ हैं, वे एक तरह का बाेझ हैं. वे अतीत में बने रहते हैं और वे पीड़ा उत्पन्न करते हैं. अब यह पक्षी वही नहीं रह गया. जब तुम किसी स्त्री के प्रेम में पड़े थे, वह स्वतंत्र थी; तुम स्वतंत्रता के साथ प्रेम में पड़े थे.
 
जब तुम उसे अपने घर ले आए, तुमने उसके लिए स्वतंत्र हाेने की सारी संभावनाएं नष्ट कर दीं, लेकिन इसे नष्ट करने के साथ तुम उसकी सुंदरता काे भी नष्ट कर रहे हाे.
 
तब एक दिन अचानक तुम पाते हाे कि तुम इस स्त्री से बिल्कुल भी प्रेम नहीं करते-क्याेंकि अब वह सुंदर न रही.
ऐसा हर बार हाेता है.
 
तब तुम दूसरी स्त्री काे खाेजना शुरू कर देते हाे और तुम यह नहीं देखते कि आखिर हुआ क्या? तुम उस पूरी यांत्रिक प्रक्रिया काे नहीं देखते कि तुमने कैसे उस स्त्री की सुंदरता काे नष्ट कर दिया? इससे सावधान रहाे.