रीडेवलपमेंट केंद्र के रूप में पुणे का कोथरूड सबसे आगे

629 प्रोजेक्ट्स में से 244 प्रोजेक्ट्स केवल कोथरूड में; ‌‘द रीडेवलपमेंट पल्स‌’ रिपोर्ट से मिली अहम जानकारी

    08-Oct-2026
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डेक्कन, 7 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

पुणे में तेजी से बढ़ रही रीडेवलपमेंट (पुनर्विकास) की प्रक्रिया में कोथरूड ने बढ़त बना ली है. पुणे जिले में पुनर्विकास के संकेत वाले कुल 629 प्रोजेक्ट्स में से 244 प्रोजेक्ट्स अकेले कोथरूड क्षेत्र के हैं. पुणे की पुनर्विकास सलाहकार और डेटा प्लेटफॉर्म संस्था ‌‘ड्रीम्स रीडेवलप्ड‌’ द्वारा जारी की गई ‌‘द रीडेवलपमेंट पल्स‌’ रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है. ममहारेराफ के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर इस रिपोर्ट में पुणे के पुनर्विकास की स्थिति का विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट के लिए किए गए अध्ययन में पुणे जिले के ‌‘महारेरा‌’ में पंजीकृत 4,823 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की गई. इनमें से 629 प्रोजेक्ट्स में पुनर्विकास के संकेत मिले हैं. गौरतलब है कि कोथरुड क्षेत्र में ‌‘महारेरा‌’ के तहत पंजीकृत 410 प्रोजेक्ट्स में से 244 प्रोजेक्ट्स पुनर्विकास से जुड़े हुए हैं, जो कि लगभग 60 प्रतिशत है. ‌‘ड्रीम्स रीडेवलप्ड‌’ के संस्थापक सीए एस. लक्ष्मीनारायणन ने मंगलवार, 6 अक्टूबर को एक पत्रकारवार्ता में इस रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष सामने रखे. यह आंकड़े दर्शाते हैं कि रीडेवलपमेंट पुणे के आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है. वर्ष 2017 में नए ‌‘महारेरा‌’ पंजीकरणों में केवल 3.6 प्रतिशत परियोजनाएं ही रीडेवलपमेंट की थीं. हालांकि, वर्ष 2023 से यह अनुपात हर साल 23 से 26 प्रतिशत के बीच रहा है, और वर्ष 2026 में यह बढ़कर 26 प्रतिशत तक पहुंच गया है. विश्लेषण की गई 1,869 सक्रिय परियोजनाओं में से 373, यानी 20 प्रतिशत परियोजनाओं में पुनर्विकास के संकेत मिलते हैं. ‌‘द रीडेवलपमेंट पल्स‌’ के लिए 19 सितंबर 2026 को ‌‘महारेरा‌’ के सार्वजनिक पंजीकरणों से एकत्र किए गए आंकड़ों का उपयोग किया गया है. रिपोर्ट में परियोजना पूरा होने की समय-सीमा (डेडलाइन) के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बातें दर्ज की गई हैं. ‌‘महारेरा‌’ की मूल समय-सीमा पार कर चुके रीडेवलपमेंट (पुनर्विकास) प्रोजेक्ट्स में से 26% प्रोजेक्ट्स निरस्त (लैप्स) हो गए थे, जबकि अन्य प्रोजेक्ट्स में यह आंकड़ा 26.7% रहा. हालांकि, 21.3% रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स समय-सीमा में विस्तार (एक्सटेंशन) लेकर जारी थे; अन्य प्रोजेक्ट्स में यह प्रमाण 12.6% था. मूल समय-सीमा पार करने वाले पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स को औसतन 16 महीने का समय-विस्तार मिला है. शहर में कोथरुड के साथ-साथ रीडेवलपमेंट के प्रमुख क्षेत्र : इस रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कोथरुड के साथ-साथ एरंडवणे-डेक्कन, पर्वतीसहक ारनगर, पिंपरी-चिंचवड़, गुलटेकड़ी- बिबवेवाड़ी और शिवाजीनगर-भांबुर्डा रीडेवलपमेंट के प्रमुख क्षेत्र हैं. हालांकि, यह भी अवलोकन दर्ज किया गया है कि किसी प्रोजेक्ट का स्थान ही उसके समय पर पूरा होने का एकमात्र निर्धारक कारक नहीं है.  
 
डेवलपर्स का बाजार बड़े पैमाने पर बिखरा हुआ नजर आ रहा
पुणे के सबसे बड़े पुनर्विकास क्लस्टर के रूप में कोथरुड की स्थिति, स्थापित आवासीय क्षेत्रों में मौजूद अवसरों के विस्तार को दर्शाती है. पुणे के पुनर्विकास क्षेत्र में डेवलपर्स का बाजार बड़े पैमाने पर बिखरा हुआ है. कम से कम एक पुनर्विकास परियोजना दर्ज कराने वाले 449 डेवलपर्स में से 393, यानी 88 प्रतिशत डेवलपर्स ने ‌‘महारेरा‌’ में केवल एक ही प्रोजेक्ट पंजीकृत कराया है. वहीं, शीर्ष दस डेवलपर्स की कुल मिलाकर हिस्सेदारी महज 16 प्रतिशत है. ‌‘द रीडेवलपमेंट पल्स‌’ के माध्यम से सार्वजनिक रूप से सत्यापित की जा सकने वाली जानकारी उपलब्ध कराना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है. - सीए एस. लक्ष्मीनारायणन संस्थापक, ड्रीम्स रीडेवलप्ड
 

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समय-सीमा का दबाव बढ़ने की संभावना काफी ज्यादा
 आने वाले समय में कार्य पूरा करने की समय-सीमा का दबाव बढ़ने की संभावना है. वर्ष 2026-27 में 214 सक्रिय पुनर्विकास परियोजनाओं के पूरा होने की उम्मीद है, जिनमें से 91 परियोजनाओं की निर्धारित समय-सीमा 2026 में और 123 परियोजनाओं की 2027 में है. इसके अतिरिक्त, वर्तमान में 30 ऐसी सक्रिय परियोजनाएं हैं जो अपनी समय-सीमा पार कर चुकी हैं, जबकि 53 परियोजनाओं को कम से कम एक बार समय-सीमा में विस्तार मिल चुका है.