मुंबई, 7 अ्नटूबर (वि.प्र./वार्ता)
आरबीआई द्वारा रेपाे रेट बढ़ाने से अब हाेम लाेन महंगा हाेगा. महंगाई बढ़ने से अब कर्ज लेना और चुकाना भी महंगा हाेगा.आखिरकार फिर महंगाई सताएगी. आरबीआई ने चेतावनी देते हुए कहाआगे कीमतें और बढ़ेंगी.
इससे फेस्टिव सीजन में खरीदारी कम हाेने का अंदेशा है. इसके चलते आरबीआई काे फरवरी 2023, यानी करीब 4 साल बाद रेपाे रेट बढ़ाना पड़ा है. रेपाे रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है. अब ये क्याें किया, इसे समझने के लिए सबसे पहले रेपाे रेट समझना जरूरी है. रेपाे रेट वाे ब्याज दर है जिस पर बैंक आरबीआई से कर्ज लेता है.
फाॅर्मूला ये है कि रिजर्व बैंक महंगा कर्ज बैंकाें काे देगा ताे बैंक लाेगाें काे और महंगा कर्ज देंगे. इससे लाेग कम कर्ज लेंगे और खर्च भी कम करेंगे. खर्च कम करेंगे ताे मांग कम हाेगी, मांग कम हाेने से महंगाई काबू में रहेगी. आरबीआई ने महंगाई का अनुमान भी बढ़ाया है. अब 2026-27 में महंगाई दर 5.2% रहने का अनुमान है, जाे पहले 5.0% था.
हालांकि, अर्थव्यवस्था के माेर्चे पर अच्छी खबर है. आरबीआई ने 2026-27 के लिए जीडीपी ग्राेथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है. आरबीआई की माॅनिटरी पाॅलिसी कमेटी यानी एमपीसी की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्हाेत्रा ने 7 अक्टूबर काे नए फैसलाें की जानकारी दी. आरबीआई ने अपना रुख भी बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है. आसान भाषा में इसका मतलब है कि फिलहाल ब्याज दराें में कटाैती की गुंजाइश कम हाे गई है. आने वाले समय में आरबीआई दराें काे स्थिर रख सकता है या जरूरत पड़ने पर इन्हें और बढ़ा सकता है. आरबीआई ने अपना रुख बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है. यानी, फिलहाल ब्याज दराें में कटाैती का रास्ता पूरी तरह से बंद हाे चुका है. आने वाली बैठकाें में रिजर्व बैंक या ताे दराें काे जैसा है वैसा ही रखेगा, या फिर जरूरत पड़ने पर इन्हें और बढ़ा सकता है.
ेलिगेयर ब्राेकिंग के अजीत मिश्रा का कहना है कि 0.25% की यह बढ़ाेतरी ताे उम्मीद के मुताबिक ही थी, लेकिन असली बात नीति में हुआ बदलाव है. इससे साफ जाहिर हाेता है कि रिजर्व बैंक के लिए अब सबसे पहला काम महंगाई पर काबू पाना है. काेटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकाेनाॅमिस्ट उपासना भारद्वाज का मानना है कि आने वाले समय में ब्याज दराें में 0.25 से 0.50% की और बढ़ाेतरी हाे सकती है. डीबीएस बैंक की सीनियर इकाेनाॅमिस्ट राधिका राव का कहना है कि रिजर्व बैंक का यह कदम दिखाता है कि वह महंगाई के खतरे काे वक्त रहते ही पूरी तरह से दबा देना चाहता है, ताकि यह आगे जाकर अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी मुसीबत न बने. रिजर्व बैंक ने देश की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है.