आकुर्डी, 8 अ्नटूबर (आ.प्र.)
आर्किटेक्चर (वास्तुशास्त्र) विभाग के छात्राें के लिए देहू और आलंदी की ऐतिहासिक धराेहरें स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं, क्षेत्रीय संदर्भाें और वास्तुकला के बीच के अंतरसंबंधाें काे समझाने में मार्गदर्शक का कार्य करती हैं.
ये धराेहरें केवल भाैतिक संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे इतिहास, संस्कृति, परंपरा, स्थानीय जीवनशैली और पर्यावरण से जुड़ा गहरा रिश्ता छुपा हुआ है. वास्तुकला समाज, संस्कृति, पर्यावरण और मानव जीवन से जुड़ी एक रचनात्मक प्रक्रिया है, जिसे समझकर आर्किटेक्चर के छात्राें काे अपना कॅरियर बनाना चाहिए, यह बात एस. बी. पाटिल काॅलेज ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन की प्राचार्या डाॅ. स्मिता सूर्यवंशी ने कही.
पिंपरी चिंचवड़ एजुकेशन ट्रस्ट (पीसीईटी) के आकुर्डी स्थित एस. बी. पाटिल काॅलेज ऑफ आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन में प्रथम वर्ष बी.आर्क. के छात्राें का ‘दीक्षारंभ 2026’ कार्यक्रम में बड़े उत्साहपूर्ण वातावरण में स्वागत किया गया.
इस अवसर पर आर्किटेक्ट प्रज्ञा आवटे ने मार्गदर्शन करते हुए कहा कि वास्तुकला का अध्ययन केवल कक्षा के सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे प्रत्यक्ष निरीक्षण, अनुभव, प्रयाेग, रचनात्मक साेच और समूह कार्य के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से आत्मसात किया जा सकता है. इसके साथ ही आवटे ने वेस्ट सामग्री से माॅडल बनाने और फाेटाेग्राफी का उपयाेग करने के तरीके के बारे में भी जानकारी दी. प्रथम वर्ष के इस स्वागत समाराेह में छात्राें काे पीसीईटी के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर लांडगे, उपाध्यक्ष पद्मा भाेसले, सचिव विट्ठल कालभाेर ने शुभकामनाएं दीं.