भारत एक विश्वसनीय वैश्विक साझेदार बन रहा

सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने ‌‘सिम्बायोसिस सेंटर फॉर वसुधैव कुटुंबकम व्याख्यानमाला‌’ में कहा

    09-Oct-2026
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लवले, 8 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

वसुधैव कुटुंबकम केवल एक काल्पनिक या प्राचीन भारतीय विचार नहीं है. यह आधुनिक समय का एक बहुत ही व्यावहारिक और प्रासंगिक विचार है. आज, जब विभिन्न देश एक-दूसरे को संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं, ऐसे में भारत ने परस्पर विरोधी वैेिशक शक्तियों के बीच भी वेिशास कायम करने की अपनी क्षमता साबित की है. भारत ब्रिक्स और क्वाड दोनों का सदस्य है, और यह केवल इसलिए संभव हो पाया है क्योंकि हम इतने सारे देशों का वेिशास जीतने में सफल रहे हैं, यह बात राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने रखी. वे सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में ‌‘सिम्बायोसिस सेंटर फॉर वसुधैव कुटुंबकम व्याख्यान श्रृंखला‌’ का उद्घाटन भाषण दे रहे थे. सिम्बायोसिस सेंटर फॉर वसुधैव कुटुंबकम द्वारा सोमवार (5 अक्टूबर) को वेिशविद्यालय के लवले परिसर में ‌‘आधुनिक समय में वसुधैव कुटुंबकम‌’ की प्रासंगिकता विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया. सिम्बायोसिस के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) एस. बी. मुजुमदार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. इस अवसर पर सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की चांसलर डॉ. विद्या येरवडेकर, कुलपति डॉ. रामकृष्णन रमन और अकादमिक मामलों की डीन डॉ. अस्मिता दानी सहित शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. अपने संबोधन में डॉ. त्रिवेदी ने कहा, दुनिया भर में क्या हो रहा है, इस पर नजर डालिए. अमेरिका, यूरोप और चीन अपनी-अपनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. यदि हम एक-एक करके विचार करें, तो आगे बढ़ने की सबसे अधिक संभावना किसकी है..? भारत की. हम अपने सामने एक बेहतरीन भविष्य देख सकते हैं. प्रो. (डॉ.) एस. बी. मुजूमदार ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा, दया और करुणा ही मवसुधैव कुटुंबकमम की आत्मा है. अब समय आ गया है कि सिम्बायोसिस वेिशविद्यालय ‌‘वसुधैव कुटुंबकम‌’ की अवधारणा, भावना और विचारों को बढ़ावा दे. हमने इस विषय पर एक ऑनलाइन पाठ्यक्रम (कोर्स) भी शुरू किया है, जिसे 30,000 से अधिक छात्र पूरा कर चुके हैं. इससे पता चलता है कि युवा इस दर्शन को समझने के लिए उत्सुक हैं.  
 
सभी के साथ अपना जुड़ाव बनाना जरुरी

दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां अपना उत्पादन भारत की ओर स्थानांतरित कर रही हैं. लेकिन उस भविष्य में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम सभी के साथ अपना जुड़ाव कैसे स्थापित करते हैं. भारत उत्पादन, रक्षा प्रौद्योगिकी और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में एक वेिशसनीय भागीदार के रूप में उभर रहा है.