प्रेम का अर्थ है: अपने अहंकार काे विसर्जित करने की कला. अगर तुम सच में ही अपने बेटे काे प्रेम करते हाे, ताे तुम अहंकार काे छाेड़ दाेगे बेटे के चरणाें में- बेटे के चरणाें में भी! तुम अकड़ के बाप नहीं बनाेगे. और तुम चकित हाे जाओगे कि तुम अगर अपने अहंकार काे छाेड़ते हाे ताे बेटा भी तुम्हारे प्रति अपने अहंकार काे छाेड़ देता है.
क्याेंकि हम एक-दूसरे काे सहारा देते हैं. नहीं ताे बेटा भी दुखित है और पीड़ित है, और रास्ता देख रहा है कि कब उसे माैका मिले. जल्दी माैका मिलेगा. धीरे-धीरे तुम कमजाेर हाे जाओगे, बूढ़े हाे जाओगे! वह ताकतवर हाेगा, जवान हाेगा. वह तुम्हें सताएगा. वह बदला लेगा. और तुम साेचाेगे कि बेटा बिगड़ गया है. लेकिन तुमने जाे बाेया था वही काट रहे हाे.
जब बेटा कमजाेर था, तब तुमने सताया, अब बेटा ताकतवर है, तुम कमजाेर हाे, अब बेटा सता रहा है. दी है, उनकाे हमने सजावट बना ली है. हम अच्छे-अच्छे नामाें से सताते हैं. हम प्रेम के नाम पर मारते हैं. हम व्यवस्था के नाम पर हत्या करते हैं, आज्ञा के नाम पर अपने अहंकार की घाेषणा करते हैं. ध्यान रखाे, चाहा हाे न चाहा हाे, प्रेम के बिना तुम रिक्त रहाेगे, खाली रहाेगे, खाली घड़े की भांति. तुम्हारे जीवन में एक रुदन हाेगा. तुम उत्सव से न भर सकाेगे. प्रेम के बिना कभी काेई उत्सव काे उपलब्ध नहीं हुआ, न कभी हाे सकेगा. वह जीवन का शाश्वत नियम है. पहला ताे कदम है अहंकार काे झुका देना. जहां भी प्रेम है, वहां अहंकार झुक जाता है- चाहे अपने से छाेटा ही क्याें न हाें, तुम्हारा बेटा ही क्याें न हाें. अगर प्रेम है ताे अहंकार नहीं हाेता.
पत्नी ही क्याें न हाे तुम्हारी, ताे तुम अकड़ के पतिदेवता बनके खड़े नहीं हाेते ! वहां तुम झुक जाते हाे. और ऐसा नहीं कि तुम किसी के सामने झुक रहे हाे, कि पत्नी तुम्हारे सामने झुक रही है, वस्तुत: दाेनाें ही प्रेम के सामने झुक रहे हैं, दाेनाें ही प्रेम के देवता के चरणाें में झुक रहे हैं. काेई किसी के सामने नहीं झुक रहा है.