डब्ल्यूटीसी 12 टीमों तक बढ़ने की संभावना : टॉम ग्रीनबर्ग

2029-31 में ज़िम्बाब्वे, आयरलैंड और अफ़गानिस्तान को चैंपियनशिप का हिस्सा बनने का मौका मिलने की उम्मीद

    09-Oct-2026
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Sports 
दुबई, 8 अ्नटूबर (वि.प्र.)
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के चीफ एग्जीक्यूटिव टाॅड ग्रीनबर्ग ने आने वाले सालाें में माैजूदा नाै-टीमाें वाली वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के 12 टीमाें तक बढ़ने की संभावना का संकेत दिया है.
 
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी), जाे दुनिया में क्रिकेट काे चलाने वाली संस्था है, के अलग-अलग सदस्य बाेर्ड अभी अगला फ्यूचर टूर्स प्राेग्राम तैयार कर रहे हैं. यह प्रक्रिया अपने आखिरी दाैर में है और साथ ही डब्ल्यूटीसी काे बढ़ाने पर भी बातचीत चल रही है.
 
2019 में शुरू हाेने के बाद से, डब्ल्यूटीसी में कुल नाै टीमें शामिल रही हैं, जाे फाइनलिस्ट तय करने के लिए दाे साल के समय में 6 सीरीज़ (तीन घरेलू और तीन विदेशी) खेलती हैं. सीरीज़ में कम से कम दाे टेस्ट मैच हाेते हैं, लेकिन भविष्य के माॅडल के तहत 2029-2031 के साइकल में ज़िम्बाब्वे, आयरलैंड और अफगानिस्तान काे चैंपियनशिप का हिस्सा बनने का माैका मिल सकता है, जाे ज़्यादातर एक-एक टेस्ट या ज़्यादा से ज़्यादा दाे टेस्ट मैच ही खेलते हैं. रिपाेर्ट के अनुसार अगले महीने बाली में हाेने वाली आईसीसी की बैठकाें में इस पर आखिरी फैसला हाेने की उम्मीद है.
 
इस बारे में कि क्या 12-टीमाें वाली डब्ल्यूटीसी काे मंज़ूरी मिल सकती है, ग्रीनबर्ग ने क्रिकइन्फाे से कहा, मुझे लगता है कि अगले दाे सालाें के लिए ऐसा ही हाेगा. हालांकि, ग्रीनबर्ग ने कुछ बाेर्ड के लिए सस्टेनेबिलिटी (लंबे समय तक चलने की क्षमता) और आर्थिक मुश्किलाें से जुड़े मुद्दाें पर भी ज़ाेर दिया, जिससे बाेर्ड के लिए हर साल अपनी कमाई से ज़्यादा खर्च करना मुश्किल हाे जाएगा.
उन्हाेंने आगे कहा, लेकिन, आखिरकार देशाें काे खुद ही मुश्किल फैसले लेने हाेंगे क्याेंकि अगर आईसीसी से उतनी कमाई नहीं हाेती रहती जितनी हमें अब तक मिली है, या वे अपने खुद के ऋढझ इंतज़ाम नहीं कर पाते हैं, ताे आखिरकार किसी भी बिज़नेस में - और हमारा बिज़नेस भी ऐसा ही है - आप हर साल अपनी कमाई से ज़्यादा खर्च नहीं कर सकते.ग्लाेबल क्रिकेट अभी कुछ जगहाें पर इसी स्थिति में है.
 
ग्रीनबर्ग ने यह भी कहा कि टेस्ट खेलने वाले देशाें की संख्या कम हाे सकती है; उन्हाेंने कहा कि इस फाॅर्मेट के महंगे हाेने और खिलाड़ियाें की टेस्ट खेलने की इच्छा में बदलाव जैसे कारण देशाें की संख्या में कमी ला सकते हैं. जब मैंने टेस्ट क्रिकेट के बारे में यह बात कही थी, ताे इसे ज़्यादा पसंद नहीं किया गया था, लेकिन मैं अब भी कहता हूं कि यह एक सच्चाई है कि समय के साथ देशाें के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना मुश्किल हाेता जा रहा है क्याेंकि यह बहुत महंगा है. जब मैं कहता हूं कि यह महंगा है, ताे इसका मतलब सिर्फ टेस्ट मैच आयाेजित करने से नहीं है. इसका मतलब है अपने सिस्टम में निवेश करने की क्षमता, ताकि रेड-बाॅल क्रिकेटराें के लिए एक ढांचा तैयार किया जा सके. आप जादू से टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिए 11 खिलाड़ी नहीं ढूंढ सकते, उन्हाेंने कहा.
 
मुझे लगता है कि भविष्य में ऐसे सदस्य देश हाे सकते हैं जाे टेस्ट क्रिकेट न खेलें, या हाे सकता है कि उन्हें अपने देश में टेस्ट क्रिकेट काे ज़िंदा रखने और उस फाॅर्मेट काे खेलते रहने के लिए घरेलू मैचाें की तुलना में ज़्यादा अवे (दूसरे देश में) टेस्ट मैच खेलने पड़े. मुझे लगता है कि हमें इस बारे में अलग तरह से साेचना हाेगा. यह आपसी लेन-देन वाला तरीका कुछ देशाें काे कंगाल बना सकता है, ग्रीनबर्ग ने द्विपक्षीय टेस्ट क्रिकेट पर बात करते हुए कहा.