कर्वे रोड, 1 नवंबर पिछले कुछ समय से सोने और चांदी दोनों ही धातुओं में लगातार गिरावट आ रही है. पहले जिस तरह अचानक दोनों धातुओं की कीमतें एकतरफा बढ़ रही थीं, उसके बिलकुल विपरीत परिस्थिति फिलहाल देखने को मिल रही है. पुणे के बाजार में रविवार, 1 नवंबर को सोने का भाव प्रति 10 ग्राम 1,37,500 रुपये और चांदी का भाव प्रति किलो 1,78,000 रुपये था. पिछले 12 दिनों में सोने की कीमतों में 5% और चांदी की कीमतों में पूरे 15% की कमी आई है. सराफ व्यवसायियों का कहना है कि अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना है. इसलिए बड़े निवेशकों के बीच एक अजीब तरह की घबराहट (पैनिक) है. मौजूदा स्थिति में अलग-अलग कारणों की वजह से निवेशकों द्वारा बहुत बड़े पैमाने पर सोने और चांदी की बिक्री की जा रही है. स्वाभाविक रूप से, बाजार में आपूर्ति (सप्लाई) बहुत अधिक बढ़ जाने के कारण दाम लगातार नीचे जा रहे हैं. शेयर बाजार में भी मंदी है. वहां हुए नुकसान की भरपाई के लिए कई लोगों ने सोने और चांदी को बेचने का विकल्प चुना है, ऐसा बताया जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की औद्योगिक मांग कम होती हुई दिखाई दे रही है और उसकी तुलना में आपूर्ति बढ़ने के कारण कीमतें गिर गई हैं. दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ने के कारण महंगाई बढ़ती जा रही है. शेयर बाजार में मंदी है और सोने तथा चांदी के भाव भी नीचे आ रहे हैं. इस सबकी वजह से उपभोक्ताओं के मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. यह स्थिति किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी नहीं है. इसलिए, ग्राहकों और निवेशकों के लिए सतर्क रहना ही हितकर होगा. साल 2026 की शुरुआत (जनवरी) में चांदी की कीमत करीब 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी, जो नवंबर 2026 आते आते घटकर करीब 1 लाख 80 हजार रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे पहुंची है. इस बड़ी गिरावट के पीछे सोलर पैनल और औद्योगिक मांग में बदलाव तथा वैेिशक आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं. पिछले 9 महीनों में सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जहां सोना 20 प्रतिशत और चांदी 50 प्रतिशत तक सस्ती हो गई है. पुणे के सराफा बाजार में 30 जनवरी 2026 को सोने का भाव प्रति 10 ग्राम 1 लाख 70 हजार रुपये के करीब पहुंच गया था, जो अब गिरकर 1 लाख 37 हजार रुपये के स्तर पर आ गया है.
जल्दबाजी में खरीदारी या बिक्री का निर्णय न लें ग्राहकों की दृष्टि से यह कहा जा सकता है कि यह खरीदारी करने या निवेश करने का अत्यंत उपयुक्त समय है. बेशक, अच्छा रिटर्न पाने के लिए दो से तीन महीने से अधिक समय तक होल्ड करने (अपने पास रखने) की तैयारी होनी चाहिए. जल्दबाजी में खरीदारी या बिक्री का निर्णय लेने के मुकाबले मप्रतीक्षा करें और देखेंफ (वेट एंड वॉच) की भूमिका अपनाना अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है. जब कीमतें स्थिर होती हैं, तो लोगों में खरीदारी करने का उत्साह होता है. असल अर्थों में दिवाली उन्हीं स्तरों पर मनाई जाती है जहां कीमतें स्थिर रहती हैं. हालांकि, दोनों धातुओं (सोने और चांदी) में गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे थोड़ी चिंता की स्थिति बनी हुई है. सराफ बाजार के इतिहास को याद करें तो यह स्पष्ट होता है कि पिछले साल जिस प्रकार सोने और चांदी में एकतरफा बढ़ोतरी हुई थी, ठीक उसी प्रकार अब एकतरफा गिरावट होती हुई दिखाई दे रही है. यह गिरावट आपके निवेश को मएवरेज आउटफ (औसत मूल्य पर लाने) करने के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है. इसलिए, ग्राहकों और निवेशकों को चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करनी चाहिए. - वास्तुपाल रांका, निदेशक, रांका ज्वेलर्स (कर्वे रोड)
सेमीकंडक्टर से चांदी फिर पहुंची काजू कतली पर ! सोशल मीडिया और सर्राफा बाजार में इस बात पर काफी चुटकुले और चर्चाएं चल रही है कि चांदी अब सेमीकंडक्टर और सोलर पैनलों से उतरकर फिर काजू कतली पर पहुंच गई हैं. जब चांदी महंगी थी तब सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग के कारण बताए जा रहे थे. वहीं दूसरी ओर काजू कतली से चांदी का वर्क गायब या प्रभावित हुआ था. लेकिन अब दाम गिरने के बाद एक बार फिर इसे लेकर मीम्स और चर्चाएं सामने आ रही हैं. मीम्स की दुनिया में आजकल काजू कतली और चांदी का गहरा रिश्ता चल रहा है. लोग कह रहे हैं - भाई, चांदी के भाव इतने कम हो गए हैं कि अब सवाल है कि काजू कतली पर जो चांदी का वर्क लगा होता है, उनमें ज्यादा महंगा कौन है? जो इन्फ्लुएंसर यह कह रहे थे कि चांदी जल्द ही 12 लाख रुपये तक पहुंचने वाली है, अब बाजार के उतार-चढ़ाव के बाद वे गायब हैं और लोग उन्हें ढूंढ रहे हैं.