शिवाजीनगर, 2 नवंबर
(आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
अनिवासी भारतीयाें के लिए पसंदीदा रियल एस्टेट डेस्टिनेशन के रूप में पुणे और मुंबई उभर रहे हैं. खासकर भारत में घर खरीदते समय उनकी साेच अब केवल इन्वेस्टमेंट रिटर्न और प्राॅपर्टी की कीमताें में बढ़ाेतरी से आगे की है.
कई ऐसे मुद्दे हैं जाे उनके खरीदारी के फैसलाें में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है जिनमें- बेहतर कनेक्टिविटी, गुणवत्तापूर्ण निर्माण, स्वास्थ्य सुविधाएं, किराए से हाेने वाली आय की संभावना और अपने बुजुर्ग माता-पिता काे आरामदायक जीवन देने की इच्छा शामिल है. पुणे और मुंबई महानगर क्षेत्र में रियल एस्टेट डेवलपर्स अनिवासी भारतीयाें की (एनआरआई) खरीदाराें की बदलती पसंद काे देख रहे हैं. उनका कहना है कि अब ये खरीदार ऐसे आवासीय घराें काे अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं जाे लंबी अवधि की सुविधा, आधुनिक सुविधाएं और जरूरी सेवाओं तक आसान पहुंच प्रदान करते हाें. कई अनिवासी भारतीयाें के लिए भारत में घर खरीदना अब सिर्फ एक वित्तीय निवेश नहीं रह गया है, बल्कि यह अपने परिवार से जुड़े रहने और भविष्य के लिए एक सुरक्षित आवास तैयार करने का माध्यम भी बन गया है.
दाेनाें शहराें में बढ़ती बुनियादी सुविधाएं पुणे और मुंबई काे अधिक आकर्षक बना रही है. पुणे में बढ़ते राेज़गार के अवसराें, प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थानाें, मजबूत स्वास्थ्य सेवाओं और अपेक्षाकृत आरामदायक जीवन शैली के कारण अनिवासी भारतीयाें के लिए घर खरीदने का एक पसंदीदा स्थान बनकर उभरा है. मुंबई से पुणे की नज़दीकी उन विदेशी भारतीयाें के बीच इसकी अपील काे और बढ़ाती है, जाे निवेश के साथसाथ निजी उपयाेग के लिए भी आवासीय संपत्तियाें की तलाश कर रहे हैं. अनिवासी भारतीयाें की यह बदलती साेच संपत्ति के मूल्य में वृद्धि (एप्रिसिएशन) पर ध्यान केंद्रित करने वाले खरीदाराें से अलग है. वे अब ऐसी खरीदारी काे अंतिम रूप देने से पहले स्वास्थ्य सुविधाएं, खासकर अस्पतालाें तक पहुंच, आसपास का बुनियादी ढांचा और विकास, सुरक्षात्मक सुविधाएं, रखरखाव की सुविधाएं और कनेक्टिविटी जैसे कारकाें पर भी ध्यान दे रहे हैं.
भविष्य में भारत वापस लाैटने की साेच : जिनके माता-पिता भारत में ही रहते हैं, ऐसे अनिवासी भारतीयाें के लिए पुणे ऐसे आवासीय विकल्प प्रदान करता है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक आवश्यकताओं तक आसानी से पहुंच मिलती है. शहर का बढ़ता आईटी और काॅर्पाेरेट राेज़गार का आधार किराए की मांग काे भी बढ़ाता है, जिससे ये आवासीय संपत्तियां उन खरीदाराें के लिए आकर्षक बन जाती हैं जाे भविष्य में भारत वापस लाैटने का विचार कर सकते हैं.