पलाश में माैजूद गुण वात राेग, चर्म राेग, पेट में कीड़ा, डायबिटीज और घाव काे भरने में काफी फायदेमंद हैं.
आयुर्वेद में पलाश के फूल, पत्ते, बीज और छाल सभी काे कई तरह की दवाइयाें में उपयाेग किया जाता है. इसके बीजाें या फूलाें के पेस्ट काे त्वचा पर लगाने से खुजली, ए्निजमा, फंगल संक्रमण, फाेड़ें-फुंसी, लालिमा और दाग-धब्बाे काे ठीक करने में मदद करता है, वहीं त्वचा के रुखेपन काे दूर करने में सहायता मिलती है.
इनकी पत्तियाें का पेस्ट या बीज के पाउडर का सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत हाेता है और पेट के कीड़े भी दूर हाेते है. इसके फूलाें और बीजाें से बनाए गए पेस्ट काे घाव पर लगाने में र्नतस्राव कम हाेता है और घाव जल्दी भरता है. इसके पत्ते में माैजूद एंटी-ऑक्सिडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण शरीर काे फ्री-रेडिकल्स से बचाते हैं और गठिया सूजन में भी लाभ पहुंचाते हैं. पलाश के फूलाें का चूर्ण शहद के साथ मिलाकार सेवन करने से मासिक चक्र नियमित हाेता है. इसके फूलाें में एंटीहाइपरग्लाइसेमिक गुण पाए जाते हैं, जाे ब्लड शुगर काे नियंत्रित करते हैं. इस चूर्ण के सेवन से कब्ज, गैस, सूजन और अपच में आराम मिलता है. यह खांसी, जुकाम, ब्रांकाइटिस और सांस की समस्याओं काे दूर करने में बहुत मदद करती है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ? पलाश के पत्ताें के चूर्ण का खाली पेट और अधिक सेवन नहीं करना चाहिए. गर्भावस्था और दुग्धपान की स्थिति में आयुर्वे द चिकित्सक से सलाह जरूर लेनी चाहिए.