पिंपरी, 2 नवंबर (आ.प्र.)
सूखे जैसे हालात और मानसून के समय पर न लाैटने के कारण, औद्याेगिक टाउनशिप में 10% पानी की कटाैती लागू की गई है. इसके बावजूद, मनपा द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले कुल पानी का 35% हिस्सा लगातार बर्बाद हाे रहा है, जिससे यह स्पष्ट हाेता है कि प्रशासन पानी के लीकेज काे राेकने के लिए गंभीर कदम नहीं उठा रहा है.
मनपा शहर काे प्रतिदिन कुल 650 एमएलडी पानी की आपूर्ति करता है. पवना बांध से 520 एमएलडी, आंद्रा बांध से 100 एमएलडी और एमआईडीसी से 30 एमएलडी समान वितरण की आवश्यकता का हवाला देते हुए, मनपा 25 नवंबर, 2019 से हर दाे दिन में एक बार पानी की सप्लाई कर रही है. लगभग 7 वर्ष बीत जाने के बाद भी, एक दिन छाेड़कर पानी की आपूर्ति जारी है. फिर भी मनपा 35% की इस बर्बादी काे राेकने में असमर्थ रहा है. शहर में अवैध नल कनेक्शन धड़ल्ले से चल रही हैं और माफी याेजना नागरिकाें और हाउसिंग साेसायटियाें से काेई प्रतिक्रिया पाने में विफल रही है. कुछ लाेग पीने के पानी का उपयाेग अन्य कामाें के लिए करते हैं और प्राइवेट टैंकराें पर बार-बार मनपा के पानी का उपयाेग करने का आराेप लगाया जाता है. वाॅशिंग सेंटराें द्वारा मनपा के पानी का उपयाेग किए जाने की शिकायतें भी बनी हुई हैं. मनपा ने अपने नागरिकाें और अपने स्वयं के विभागाें से पानी का विवेकपूर्ण उपयाेग करने का आग्रह किया है. हालांकि, 35% के नुकसान काे राेकने काेई ठाेस उपाय नजर नहीं आते हैं.
मनपा की भाषा में, इस तरह के लीक और चाेरी काे बेहिसाब पानी कहा जाता है. नागरिकाें का मानना है कि इसे राेकने से पानी की कमी वाले क्षेत्राें के लिए पर्याप्त पानी सुनिश्चित हाे सकेगा. शहर में 8 लाख पंजीकृत प्राॅपर्टीज हैं, लेकिन केवल 2 लाख के करीब अधिकृत नल कनेक्शनधारक हैं.
अवैध कनेक्शनाें की संख्या 25,000 से अधिक है और यह झुग्गियाें, चाॅल और अवैध निर्माणाें में सबसे आम है. हाउसिंग साेसायटियाें में, पानी अपर्याप्त हाेने पर दाे से तीन अवैध कनेक्शन ले लिए जाते हैं और मालिक उन्हें नियमित कराने से इन्कार कर देते हैं, जिससे मनपा का पानी मुफ्त में इस्तेमाल हाेता है.