सक्षम साहित्य कला मंच का प्रथम वार्षिक महोत्सव संपन्न

‘सक्षम: संवेदना-क्षमता-मनोबल‌’ पुस्तक का विमोचन; सामाजिक एकता और पुनर्वास का संदेश

    04-Nov-2026
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पुणे, 3 नवंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

कला, साहित्य और मानवीय संवेदनाओं को समर्पित ‌‘सक्षम साहित्य कला मंच‌’ (डडघच्‌‍) का प्रथम वार्षिक महोत्सव पुणे के रानी मैरी तकनीकी संस्थान (टचढख) स्थित कारगिल ऑडिटोरियम में भव्यता और गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया. इस अवसर पर संस्था की पहली वार्षिक साहित्यिक पुस्तक ‌‘सक्षम: संवेदनाक्षम ता-मनोबल‌’ का आधिकारिक विमोचन भी किया गया. समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में एयर मार्शल भूषण गोखले (सेवानिवृत्त) उपस्थित रहे. विशिष्ट अतिथियों के रूप में ब्रिगेडियर दिलीप पटवर्धन, कर्नल बी.के. सक्सेना, कुमार अजवाणी और रविबाला काकतकर ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई. पुस्तक ‌‘सक्षम: संवेदना-क्षमता- मनोबल‌’ में वीर दिव्यांग सैनिकों के अदम्य साहस, विशेष बच्चों की सहज एवं मौलिक रचनात्मकता और समाज के प्रबुद्ध रचनाकारों की उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों को संकलित किया गया है. यह संकलन मानवीय संवेदनाओं, आत्मवेिशास और रचनात्मक क्षमता का महत्वपूर्ण दस्तावेज है. कार्यक्रम के संस्थापक एवं टचढख के डीन कर्नल डॉ. वसंत बल्लेवार ‌‘तीर‌’ (सेवानिवृत्त) ने स्वागत एवं उद्घाटन संबोधन में कहा कि ‌‘सक्षम‌’ केवल एक मंच नहीं, बल्कि एक जीवंत जीवन-दर्शन है. यह संवेदना, क्षमता और मनोबल के तीन मूल स्तंभों पर आधारित है और समाज में निरंतर नई चेतना का संचार कर रहा है. कार्यक्रम का समन्वय एवं संचालन समन्वयक दिव्या कठारे ने किया. संस्था द्वारा आयोजित 11 सफल मासिक कार्यक्रमों के बाद आयोजित इस वार्षिक महोत्सव में दिव्यांग सैनिकों, विशेष बच्चों और प्रतिष्ठित कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, कविगोष्ठियों और विभिन्न प्रतिभा प्रदर्शनों के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया. इस दौरान शैली जोशी, रीना सिन्हा, विजेता पाचपोर, किशोर पवार और शिवाजी तेलंगे ने कार्यक्रम के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. मेघना सिंदकर ने कत्थक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी, जिसमें विनायक गुरुर ने तबले और गणेश रणखंब ने हारमोनियम पर संगत की. वहीं, सलिल लाटे ने भावपूर्ण गायन और अतुल मिश्रा ने गिटार के साथ ऊर्जावान गीतों की प्रस्तुति दी. सैनिकों के बच्चों ने समूह नृत्य और मंत्रोच्चार के माध्यम से कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया. समारोह का समापन डडघच की सह-संस्थापिका जयंती खरे के धन्यवाद ज्ञापन एवं समापन संबोधन के साथ हुआ. उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी गणमान्य अतिथियों, कलाकारों, प्रतिभागियों और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया. ‌