पति-पत्नी का झगड़ा गर्भपात का आधार नहीं हो सकताः सुप्रीम कोर्ट

गर्भ में पल रहे बच्चे पर पिता का भी अधिकार

    04-Nov-2026
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SC 
नई दिल्ली, 3 नवंबर (वि.प्र.)
सुप्रीम काेर्ट में एक महिला ने 6 महीने से अधिक की गर्भावस्था काे समाप्त करने की अनुमति मांगी है. महिला ने अपने पति और ससुराल वालाें पर बुरा बर्ताव करने का आराेप लगाया है. वहीं महिला के पति ने इस याचिका का विराेध करते हुए कहा कि अजन्मे बच्चे पर उसका भी अधिकार है.
 
इस मामले में काेर्ट ने कहा, सिर्फ वैवाहिक कलह गर्भपात का आधार नहीं हाे सकती. इससे समाज किस दिशा में जाएगा.
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर.
 
महादेवन की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए साेमवार काे कहा कि बलात्कार या याैन उत्पीड़न के मामलाें में, या फिर भ्रूण में काेई समस्या हाेने पर गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यह मामला बिल्कुल अलग है. काेर्ट ने सवाल किया कि अगर काेई महिला सिर्फ इसलिए गर्भपात का फैसला ले ले कि उसके पति और ससुराल वालाें ने उसके साथ बुरा बर्ताव किया है या उसे प्रताड़ित किया है, ताे समाज किस दिशा में जाएगा? काेर्ट ने महिला काे समझाते हुए कहा, पति-पत्नी के बीच एक-दूसरे के खिलाफ बातें हाेना आम बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इस आधार पर गर्भावस्था काे समाप्त कर दिया जाए. सुप्रीम काेर्ट ने कहा, यह याैन उत्पीड़न का मामला नहीं है और न ही यह किसी अकेली महिला के गर्भवती हाेने का मामला है. अगर काेई पत्नी अपने पति और ससुराल वालाें के साथ झगड़े के कारण गर्भपात कराना चाहे, ताे समाज के ताैर पर हम किस दिशा में जा रहे हैं... पिता के अधिकाराें का क्या हाेगा? बेंच ने याचिकाकर्ता महिला से वर्चुअल माध्यम से बात की और कहा कि वह इस गर्भावस्था काे आगे नहीं बढ़ाना चाहती और वह तलाक लेना चाहती है.