भाेपाल, 4 नवंबर (वि.प्र.)
मध्य प्रदेश की राजधानी भापाल में स्थित सरकारी बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय (भाेपाल यूनिवर्सिटी) में एक चाैंकाने वाला मामला सामने आया है. विश्वविद्यालय ने कथित ताैर पर वर्ष 1988 से 2023 के बीच 35 वर्षाें तक शिक्षकाें और गैर- शिक्षण कर्मचारियाें काे लगभग 275 कराेड़ रुपये का वेतन भुगतान किया, लेकिन इस अवधि में कर्मचारियाें की उपस्थिति का काेई आधिकारिक रिकाॅर्ड उपलब्ध नहीं है.
सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी से यह खुलासा हुआ है. हैरानी की बात यह है कि विश्वविद्यालय के पास कर्मचारियाें की हाजिरी दर्ज करने वाले रजिस्टर ही उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि कर्मचारियाें की वास्तविक उपस्थिति और कामकाज की पुष्टि किए बिना इतने बड़े पैमाने पर वेतन भुगतान कैसे किया गया? विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र धर्मेंद्र सिंह ने आरटीआई के माध्यम से कर्मचारियाें की उपस्थिति व वेतन भुगतान से संबंधित जानकारी मांगी थी. प्राप्त जवाब में सामने आया कि विश्वविद्यालय के पास संबंधित 35 वर्षाें के उपस्थिति रजिस्टर उपलब्ध नहीं हैं. धर्मेंद्र सिंह ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारियाें की उपस्थिति का काेई रिकाॅर्ड ही नहीं है, ताे वेतन किस आधार पर दिया गया? क्या शिक्षक वास्तव में कक्षाओं में पढ़ाने आते थे या बिना काम किए ही वेतन प्राप्त कर रहे थे? उन्हाेंने इसे एक बड़ा संभावित घाेटाला बताते हुए पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है.
5 शिक्षकाें से शुरू हुआ विश्वविद्यालय वर्ष 1988 में विश्वविद्यालय में केवल पांच शिक्षक और कुछ विभाग थे. समय के साथ इसका विस्तार हुआ और वर्तमान में यहां 20 विभागाें में लगभग 40 नियमित शिक्षक कार्यरत हैं. इसके अतिरिक्त 21 संविदा शिक्षक और करीब 250 अतिथि व्याख्याता भी सेवाएं दे रहे हैं. विश्वविद्यालय का वर्तमान वार्षिक खर्च लगभग 13 कराेड़ रुपये बताया गया है.