सृजन करने वाले शांति और आनंद काे उपलब्ध हाेते हैं

    10-Feb-2026
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Osho 
 
मैं आपसे यह कहना चाहता हूं, जीवन में जाे भी जाेड़ता है, वह आनंद काे उपलब्ध हाेता है. जाे भी क्रिएट करता है, जाे भी सृजन करता है, जाे भी बनाता है, वह आनंद काे उपलब्ध हाेता है. अगर आप दुःखी है ताे उसका अर्थ है, आपने केवल ताेड़ना सीखा हाेगा, जाेड़ना नहीं.अगर आप दुःखी हैं ताे आपने मिटाना सीखा हाेगा, बनाना नहीं. आपने जीवन में कुछ बनाया, कुछ सृजन किया, क्रिएट किया? आपके जीवन से कुछ निर्मित हुआ? कुछ सृजित हुआ, कुछ बना, कुछ पैदा हुआ? काेई एक गीत, जाे आपके मरने के बाद भी गाया जा सके, काेई एक मूर्ति, जाे आपके बाद भी स्मृति बनी रहे, काेई एक पाैधा, जाे आपके न हाेने के बाद भी छाया दे? आपने कुछ बनाया, कुछ निर्मित किया? जाे आपसे बड़ा हाे. जाे आप मिट जाएं और रहे, जाे आप न हाे और फिर भी हाे. जाे मनुष्य सृजन करता है, वही मनुष्य शांति काे और आनंद काे उपलब्ध हाेता है.
 
जिसके जीवन में जितनी सृजनात्मकता, जितनी क्रिएटिविटी हाेती है, उसके जीवन में उतनी ही शांति और उतना ही आनंदहाेता है. जाे लाेग केवल मिटाते और ताेड़ते हैं, वे आनंदित नहीं हाे सकते.्नयाें सृजन करने से मनुष्य काे आनंद उपलब्ध हाेता है? जाे व्य्नित जितने दूर तक सृजन करता है, वह उतने दूर तक ईश्वर का भागीदार हाे जाता ईश्वर है सृष्टा, और जब भी हम कुछ सृजन करते हैं, ईश्वर का अंश हममें काम करने लगता है और जाे व्य्नित सारे जीवन काे सृजनात्मक बना देता है, सारे जीवन काे एक सृजनात्मक सेवा मेें समर्पित कर देता है, उसके जीवन में संपूर्ण रूप से ईश्वर प्रगट हाेने लगता है. उसका जीवन आनंद से, प्रेम से भर जाता है. सुख के लिए, आनंद के लिए सृजनात्मकता चाहिए.कुछ निर्मित करें, कुछ बनाएं, जाे आपसे बड़ा हाे.
 
आपका जीवन केवल समय का गूजरना न हाे, बल्कि एक सृजन हाे. वह सृजन चाहे छाेटा-सा क्यों न हाे, वह आपके प्रेम का कृत्य हाे. जाे लाेग जीवन में सृजनात्मक हाे पाते हैं, जाे लाग भी जीवन में छाेटे-से प्रेम के कृत्य काे निर्माण दे पाते हैं. फिर आनंद ऊपर से थाेपा हुआ नहीं हाेगा. फिर वह आनंद उनके प्राणाें के अंतिम केंद्र से उठता हैं, फिर उनके प्राणाें के केंद्र से उठता है और उनके सारे जीवन काे भर देता है. जाे व्य्नित निर्मित करने में संलग्न हाे, स्मरण रखना हाेगा. क्योंकि सामान्यतया, हमें इस बात का स्मरण भी नहीं है कि सुख केवल उनका भाग्य बनता है, जाे सृजन करते हैं. सुख ताे हम सब चाहते हैं, लेकिन सृजन हम काेई भी नहीं करते.
इसलिए सुख से हमारा कभी भी काेई संबंध नहीं हाे पाता.
 
काेई संबंध नहीं हाे पाता सुख से हमारा. यदि हम सृजन कर पाएं, ताे सुख बाई प्राेड्नट है सृजन की.सुख सीधा नहीं मिलता.आनंद सीधा उपलब्ध नहीं हाेता. जाे सृजन करता है, उसे उपलब्ध हाेता है.जैसे फूल सीधे नहीं मिलते. जाे पाैधा लगाता है, बीज बाेता है, पानी डालता है, पाैधे की रक्षा करता है, पाैधे पर श्रम करता है, उसे फूल उपलब्ध हाेते हैं. फूल सीधे उपलब्ध नहीं हाेते. वैसे ही आनंद के फूल भी सीधे उपलब्ध नहीं हाेते. जाे सीधा फूल ही चाहता हाे, फूलाें काे बिना पानी डाले, उसे फूल नहीं मिलेंगे, उसके हाथ के फूल भी सड़ जाएंगे. फूल ताे उपलब्ध हाेते हैं, बीज काे बाेने से. वैसे जाे सृजन के बीज बाेता है, उसे आनंद के फूल उपलब्ध हाेते हैं.