पहले के लाेग अच्छे थे ताे युद्ध और हिंसा काैन करता था?

    12-Feb-2026
Total Views |
 

Osho 
 
एक ताे यह कहना कि आजकल की दुनिया खराब हाे गई है, इस बुनियादी भ्रम पर खड़ा हुआ है कि पहले की दुनिया अच्छी थी.
यह बात इतनी बुनियादी रूप से गलत है जिसका काेई हिसाब नहीं. पहले की दुनिया भी आज से अच्छी नहीं थी.आज का आदमी खराब हाे गया है, इससे ऐसा खयाल पैदा हाेता है कि पहले का आदमी बहुत अच्छा था. शायद आपकाे पता नहीं कि इस तरह के खयाल के पैदा हाे जाने का कारण क्या है ? जमीन पर जाे पुरानी से पुरानी किताबें उपलब्ध हैं, सबसे पुरानी किताब चीन में उपलब्ध है, जाे काेई छह हजार वर्ष पुरानी है. उस पुरानी किताब में भी यह लिखा हुआ है कि आज की दुनिया खराब हाे गई है, पहले के लाेगबहुत अच्छे थे. ये पहले के लाेग कब थे ? आज तक एक भी ऐसी किताब नहीं मिली है, जिसने यह कहा हाे अभी के लाेग अच्छे हैं, जाे लाेग माैजूद हैं, ये अच्छे हैं. अब तक मनुष्य-जाति के पास ऐसा एक भी उल्लेख नहीं, जाे यह कहता हाे - अभी के लाेग अच्छे हैं. पहले के लाेग अच्छे थे. ये पहले के लाेग कब थे ? बुद्ध और महावीर यह कहते हैं कि जमाना खराब हाे गया, लाेग बुरे हैं, पहले के लाेग अच्छे थे.
 
क्राइस्ट यह कहते हैं कि लाेग बुरे हैं, पहले के लाेग अच्छे थे. ये पहले के लाेग कब थे ? और अगर अच्छे लाेग जमीन पर थे, ताे अच्छे लाेगाें से बुरे लाेग पैदा कैसे हाे गए ? वह अच्छी संस्कृति से बुरी संस्कृति पैदा कैसे हाे गई ? उस अच्छे से विकार कैसे पैदा हाे गया ? नहीं, सच्चाई कुछ और है. सच्चाई बिलकुल उलटी है.अगर पहले के लाेग अच्छे थे ताे युद्ध काैन करता था, हिंसा काैन करता था ? पुरानी से पुरानी युद्ध की कथा हमारी महाभारत की हैे, वे लाेग अच्छे लाेग थे ? अपनी पत्नियाें काे दांव पर लगाने वाले लाेग अच्छे थे ? आज एक साधारण आदमी भी अपनी पत्नी काे दांव पर लगाने में दाे दा विचार करेगा, साेचेगा कि, क्या यह उचित है? लेकिन उस समय, जिसकाे हम कहें कि जाे धर्म का बहुत विचारशील आदमी था, वह भी विचार नहीं कर रहा है पत्नी काे दांव पर लगाते वक्त. जुआ खेलने में काेई संकाेच नहीं हाे रहा है उसे. अपने ही भाई की पत्नियाें काे नग्न करने में किसी काे काेई संकाेच नहीं हाे रहा है बीच सभा में. और वे अच्छे लाेग थे?