बांग्लादेश में गुरुवार काे हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) व तारिक रहमान की ऐतिहसिक जीत से कार्यकर्ताओं में जश्न का माहाैल है. 299 में से 209 सीटाें बंपर जीत के साथ 20 साल बाद सत्ता का रास्ता अब साफ हाे गया है. बता दें कि पूर्व पीएम खालिदा के बेटे तारिक रहमान का पीएम बनना तय माना जा रहा है. 17 साल के लंदन निर्वासन के बाद स्वदेश लाैटने पर जनता ने उन्हें सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा दिया है. हिंदू बहुल क्षेत्राें में भी उन्हें जबर्दस्त समर्थन मिला.बांग्लादेश काे करीब 35 साल के बाद पुरुष पीएम मिलेगा. वहीं ‘जमात’ काे करारा झटका लगा है. हालांकि जमात ने कई दलाें से गठबंधन किया था बावजूद उन्हें जबर्दस्त झटका लगा है.
तारिक रहमान की जीत पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें बधाई दी. उन्हाेंने कहा, मेरे भाई तारिक, उनकी टीम और बाकी सभी काे बधाई.बांग्लादेश में 1988 में काजी जफर अहमदप्रधानमंत्री बने थे. इसके बाद 1991 से 2024 तक देश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा. ये दाेनाें ही प्रधानमंत्री बनती रहीं.बांग्लादेश चुनाव में कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है. उसके गठबंधन काे सिर्फ 70 सीटें प्रधानमंत्री बने थे. इसके बाद 1991 से 2024 तक देश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा. ये दाेनाें ही प्रधानमंत्री बनती रहीं.
बांग्लादेश चुनाव में कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है. उसके गठबंधन काे सिर्फ 70 सीटें मिलीं हैं.शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी यानी एनसीपी काे भी बांग्लादेशियाें ने नकार दिया. पूर्व पीएम शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वाेट खासकर हिंदू वाेटर बीएनपी में शिफ्ट हाे गए. बीएनपी काे अवामी लीग के गढ़ रहे गाेपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है. जमात का अतीत आड़े आ गया, लाेगाें काे याद रहा कि उसने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विराेध किया था. जमात इस दाग काे नहीं धाे पाई. स्टूडेंट्स की नेशनल सिटीजन पार्टी काे आपसी फूट और जमात से गठबंधन करना भारी पड़ा. उन्हें लाेगाें ने पूरी तरह खारिज कर दिया.