नई दिल्ली, 13 फरवरी केवल 6.5 ओवर मे सैकड़ा बना लेने के बाद के 13.1 ओवर में केवल 109 रन बनानेवाली और पारी के आखिरी दौर में केवल 11 गेंद में 5 विकेट खो देनेवाली भारतीय टीम भले ही नामीबिया को हराकर फुली ना समाए लेकिन असली हकीकत से तो कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्य कुमार यादव दोनों वाकिफ हैं.एक समय था जब स्पिन गेंदबाजी भारत का सबसे घातक हथियार था, लेकिन आज वह क्रिकेट के हर फॉर्मेट में इसी डिपार्टमेंट में मार खा रहा है. वह गलतियों से सबक नहीं ले रहा है और वही उसकी कमजोरी बन गई है. अब पाकिस्तान के साथ मैच में स्पिन गेंदबाजी का सामना करना भारतीय टीम के लिए आसान नहीं होने वाला है. नामीबिया के ख़िलाफ भारतीय टीम की 93 रन से जीत के साथ बाद अपने शुरुआती दोनों मैच जीत लिए हैं, लेकिन कुछ सवाल विकराल होते जा रहे हैं. यह हाल सिर्फ कल के मैच के नहीं बल्कि हाल के सालों में स्पिनर्स के ख़िलाफ ख़राब प्रदर्शन टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमजोरी के रूप में देखा जा रहा है.नामीबिया के ख़िलाफ भारत की शुरुआत इतनी शानदार थी कि टीम ने महज सात ओवर में ही एक विकेट गंवाकर 104 रन बना लिए थे.लेकिन नामीबिया के कप्तान जेरार्ड ने मैच में अपनी पहली गेंद पर ही 20 गेंद में अर्धशतक जड़ने वाले ईशान किशन को पविलियन भेज दिया. इसके बाद भारतीय बल्लेबाज जेरार्ड इरास्मस की स्पिन के आगे संघर्ष करते नजर आए. उन्होंने 4 ओवर में महज 20 रन देकर किशन के अलावा तिलक वर्मा, हार्दिक पंड्या और अक्षर पटेल का विकेट भी लिया.वहीं नामीबिया के तेज गेंदबाज रुबेन ने इस मुकाबले मे 9.5 के इकोनॉमी रेट से रन खर्च किए. जबकि बाकी सभी गेंदबाजों का इकोनॉमी रेट तो 10 से भी अयादा का रहा.इससे पहले अमेरिका के स्पिनर्स ने भी भारतीय बल्लेबाजों को ख़ासा परेशान किया.लेग स्पिनर मोहम्मद मोहसिन ने भारत के ख़िलाफ 4 ओवर में 16 रन देकर एक विकेट लिया था.हरमीत सिंह ने 4 ओवर में महज 26 रन खर्च दो भारतीय बल्लेबाजों को पविलियन वापस भेजा था. 15 फरवरी को पाकिस्तान के साथ मैच से पहले ये सवाल इसलिए और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि कोलंबो की पिचों को स्पिनर्स के लिए भारतीय पिचों से भी अयादा मददगार माना जाता है और दूसरे यह कि पाकिस्तान अब अपने तेज गेंदबाजों की बजाए स्पिनर्स पर ही अयादा भरोसा दिखा रहा है.उसने नीदरलैंड्स के ख़िलाफ 4 और अमेरिका के ख़िलाफ 5 स्पिनर्स को आजमाया और इनमें 13 विकेट झटके हैं. सच तो यह है कि स्पिनर्स के ख़िलाफ भारतीय बल्लेबाजों का संघर्ष 2024 से ही चल रहा है, 2024 में भारत ने 12 साल के लंबे अंतराल के बाद अपनी जमीन पर टेस्ट सीरीज 3-0 से गंवाई थी. इसके बाद दक्षिण अर्रीका ने भी भारतीय जमीन पर 2-0 से टेस्ट सीरीज अपने नाम की. हाल के सालों में भारतीय बल्लेबाजों का स्पिनर्स के ख़िलाफ प्रदर्शन पहले जैसा नहीं रहा है. स्पिनर्स को खेलने के मामले में भारतीय बल्लेबाज पहले से कमजोर हुए हैं.
स्पिनर्स से संघर्ष करना टीम के लिए चिंता की बात भारतीय बल्लेबाजों के स्पिनर्स के ख़िलाफ संघर्ष करने के हालिया इतिहास को देखते हुए पाकिस्तान अपने स्पिनरों के सहारे ही भारत को हराने की योजना बना रहा होगा. जिस तरह से भारतीय बल्लेबाज स्पिनर्स के ख़िलाफ संघर्ष कर रहे हैं, ये आने वाले मैचों से पहले टीम के लिए चिंता की बात है. भारत में खेल रहे थे, इसलिए ये बात मैनेज हो गई लेकिन कोलंबो में स्पिन गेंदबाजों को यहां से अयादा टर्न मिलता है. अगर भारतीय बल्लेबाज इसी तरह से खेलते हैं तो पाकिस्तान के ख़िलाफ उसे मुश्किल हो सकती है.