पुणे, 15 फरवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) दक्षिणी कमांड में दो दिन का ‘जेएआई' से विजय सेमिनार आयोजित किया गया था. यह एक फोकस्ड प्रोफेशनल फोरम था जिसका मकसद ‘जेएआई' के विजन में जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन को आगे बढ़ाना था. ताकि एक इंटीग्रेटेड, भविष्य के लिए तैयार और टेक्नोलॉजी से मजबूत फोर्स बनाई जा सके. इस सेमिनार में सीनियर मिलिट्री लीडरशिप, वेटरन्स, साइंटिस्ट, इंडस्ट्री लीडर, स्टार्ट-अप और एकेडमिक एक्सपर्ट एक साथ आए ताकि मल्टी- डोमेन रेडीनेस और एक विकसित भारतअलाइन्ड सिक्योरिटी फ्रेमवर्क के लिए सोच और एक्शन को एक साथ लाया जा सके. सेमिनार की शुरुआत सदर्न कमांड के कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के ओपनिंग एड्रेस से हुई. उन्होंने इस बात पर जोर दिया, युद्ध के बदलते स्वरूप के लिए भविष्य की लड़ाइयों में ऑपरेशनल फायदा और स्ट्रेटेजिक अहमियत बनाए रखने के लिए सही मायने में इंटीग्रेटेड, इनोवेशन से चलने वाली और आत्मनिर्भर सेनाओं की जशरत है. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने जेएआई के तीन पिलर्स जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन को विजय के रास्ते के तौर पर हाईलाइट किया, और भविष्य की फोर्स रेडीनेस के लिए टेक्नोलॉजी एरजार्प्शन और इंस्टीट्यूशनल ट्रांसफॉर्मेशन पर जोर दिया. सेमिनार में ‘जेएआई' बदलाव के मुख्य पिलर्स पर बात करते हुए तीन थीमैटिक सेशन आयोजित किए गए. पहला सेशन ‘आत्मशक्ति : कॉम्बैट स्ट्रेंथ और सेल्फ-रिलायंस' के लिए लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया (रिटायर्ड) ने मॉडरेट किया था. दूसरे सेशन में ‘आत्मनिर्भरता: स्वदेशी इकोसिस्टम के जरिए डिफेंस कैपेबिलिटी बनाना' पर चर्चा हुई, जिसे लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी (रिटायर्ड) ने मॉडरेट किया था. आखिरी सेशन, ‘मिलिट्री-सिविल फ्यूजन : जॉइंटनेस और आत्मनिर्भरता' के लिए डिफेंस इनोवेशन को बढ़ावा देना इस विषय पर था. इसे लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (रिटायर्ड) ने मॉडरेट किया था.