65 साल पहले अपहृत बेटी 80 की उम्र में मायके लाैटी

    17-Feb-2026
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उत्तर प्रदेश के हरदाेई जिले से एक ऐसी मार्मिक और अविश्वसनीय कहानी सामने आई है, जाे किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है, लेकिन यह साै फीसदी सच है. 65 साल पहले डकैताें द्वारा अगवा की गई एक बेटी, 80 वर्ष की उम्र में अपने बेटी के संकल्प के चलते आखिरकार अपने मायके लाैट सकी. यह मिलन न सिर्फ एक परिवार के लिए भावुक क्षण था, बल्कि यह रिश्ताें की मजबूती और यादाें की अमिट छाप का भी प्रमाण बन गया.इस कहानी की शुरुआत वर्ष 1961-62 में बेहटा गाेकुल थाना क्षेत्र के टाेलवा आट गांव से हाेती है. गांव के बाहर पुरवा में रहने वाले बलदेव के घर डकैताें ने भीषण डकैती डाली. डकैताें काे जब घर में काेई कीमती सामान नहीं मिला, ताे उन्हाेंने बलदेव और उनके बेटे शिवलाल काे घायल कर दिया और उनकी 15 वर्षीय बेटी मिठनी का अपहरण कर लिया.
 
घटना के कुछ ही समय पहले मिठनी की शादी सुरसा थाना क्षेत्र के पुनुआवर गांव में हुई थी और उसका गाैना हाेने वाला था, लेकिन उससे पहले ही उसकी जिंदगी ने दर्दनाक माेड़ ले लिया.डकैत मिठनी काे कई दिनाें तक जंगलाें में घुमाते रहे और बाद में अलीगढ़ क्षेत्र में बेच दिया. यहां दादाें थाना क्षेत्र कसमेघा गांव के रहने वाले पहलवान साेहनलाल यादव काे इसकी जानकारी मिली. उन्हाेंने अपने साथियाें के साथ मिठनी काे छुड़ाया और बाद में उससे विवाह कर लिया. मिठनी ने उनके साथ नई जिंदगी शुरू की और उनके आठ बच्चे हुए.हालांकि, अपने मायके और परिवार की याद उनके मन में हमेशा जिंदा रही.मिठनी अक्सर अपने बच्चाें काे अपने मायके, सकाहा गांव के शिव मंदिर, पिता बलदेव और भाइयाें शिवलाल व सूबेदार के बारे में बताया करती थीं. नाेयडा में रहने वाली उनकी सबसे छाेटी बेटी सीमा यादव ने मां की इस अधूरी इच्छा काे पूरा करने का संकल्प लिया.