बदलती जीवनशैली, प्रदूषण और खराब खान-पान के कारण आजकल बालाें की जड़ें भी कमजाेर हाेती जा रही हैं. जिससे समय से पहले बाल फेल हाेने और बालाें के टूटने की समस्याएं बढ़ गई हैं. आयुर्वे द में बालाें की देखभाल के लिए कई जड़ी-बूटियाें का इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिनमें से निर्गुंडी भी एक है. निर्गुंडी एक बहुउपयाेगी जड़ी-बूटी है. इसका उपयाेग प्राचीन समय से कई समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता रहा है.बालाें के लिए इसके पत्ते से बने तेल, पेस्ट, सूखे पत्ते से बने पाउडर, इसके पत्ते में एंटीबै्नटीरियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं. निर्गुंडी के पत्ताें काे उबालकर उस पानी का इस्तेमाल बालाें पर करने से बालाें का झड़ना कम हाेता है और डैंड्रफ भी कम हाेता है. निर्गुंडी के इस्तेमाल से सिर की त्वचा में र्नत संचार बेहतर हाेता है, जिससे बाल स्वस्थ रहते हैं. निर्गुंडी में माैजूद एंटीबै्नटीरियल गुण स्कैल्प पर माैजूद फंगल संक्रमण और खुजली काे भी कम करता है. साथ ही सिर की त्वचा में हाेने वाली जलन काे कम करने में मदद मिलती है. निर्गुंडी में माैजूद पाेषक तत्व बालाें काे चमकदार और मजबूत बनाते हैं.