स्वारगेट, 22 फरवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) स्वारगेट स्थित गणेश कला क्रीड़ा मंच पर रविवार 22 को नारायण रेकी सत्संग परिवार द्वारा आयोजित ट्रांसफॉर्मेशनल स्पीकर राजेेशरीजी मोदी (राज वशेष सत्संग उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ. जे से दोपहर 1:30 बजे तक चले इस कार्यक्रम रामेश्वर चौधरी, मुरलीधर चौधरी, तोलाराम देवेंद्र पित्ती, महालक्ष्मी मंदिर के प्रमुख ट्रस्टी ार अग्रवाल, अमिता अग्रवाल, नीता अग्रवाल, अग्रवाल और आभा चौधरी सहित शहर और के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नागरिक, साधक श्रद्धालु उपस्थित रहे. ंग का मुख्य विषय ‘कुबेर का खजाना' रहा, नारायण शास्त्र पर आधारित बताया गया. राज दीदी संबोधन में कहा कि कुबेर का खजाना केवल तक है, उन्होंहै और सरल भाषा में जीवन को सही दिशा देने का मार्ग बताता है. जहां पारंपरिक शास्त्र सात प्रकार के सुखों का उल्लेख करते हैं, वहीं नारायण शास्त्र चार मूलभूत सुखों पर जोर देता है तन का स्वास्थ्य, मन का स्वास्थ्य, धन का संतुलन और आपसी संबंधों की स्वस्थता. अन्य सभी सुख इन्हीं में समाहित हो जाते हैं. नारायण रेकी सत्संग परिवार का संकल्प, हर घर में सुख शांति और समृद्धि नारायण रेकी सत्संग परिवार एक सक्रिय सामाजिक संगठन है, जिसके अंतर्गत नारायण रेकी की विभिन्न गतिविधियों का संचालन है. संस्था उद्देश्य है क ेक संस्थापिका श्रीमती राजेेशरी जी मोदी, जिन्हें स्नेहपूर्वक राज दीदी कहा जाता है, पिछले 30 वर्षों से सामाजिक सेवा में समर्पित हैं. वे रेकी ग्रैंडमास्टर, एक्यूप्रेशर चिकित्सक और उत्कृष्ट सलाहकार हैं. सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है.नारायण भवन गोरेगांव पश्चिम और राजस्थानी मंडल कार्यालय गोकुलधाम गोरेगांव पूर्व में उनके मार्गदर्शन में नारायण रेकी हीलिंग, एक्यूप्रेशर हीलिंग और विभिन्न नारायण रेकी पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं. ट्रस्ट द्वारा प्रतिदिन लगभग 650 लोगों को भोजन वितरण की सेवा है. देश वदेश में अपने ानों और क स्वारगेट (आज क स्वारगेट फरवरी 2026 वेिश प्रसिद्ध दीदी) का ि प्रातः 10 ब में पुणे के चौधरी, राजकुमा दीपा अ आसपास और श्रद्ध सत्स जिसे ना ने अपने भौतिक नारायण रेकी सत्संग परिवार की ‘राज दीदी' ने बताए समृद्धि, संतुलन और सकारात्मक जीवन के प्रभावशाली सूत्र क धन तक सीमित नहीं ह, बल्कि यह स्वस्थ तन, म न, संतुलित धन और मधुर संबंधों का समन्वय होंने समझाया कि यदि व्यक्ति इन चार आधारों शक्त कर ले, तो जीवन में स्थायी सुख और द्ध संभव है.उन्होंने कहा कि नारायण शास्त्र विभिन्न का सार प्रस्तुत करता किया जाता ह. सस्था का उद्दश्य ह कि हर व्यक्ति तन, मन, धन और संबंधों से स्वस्थ बने, हर घर में सुख, शांति और समृद्धि स्थापित हो तथा प्रत्येक व्यक्ति उन्नति, प्रगति और सफलता प्राप्त करे. संगठन का ध्येय सतयुग के मूल्यों को पुनर्जीवित करना है. इस संस्था की सवा भी दी जा रही ह. दश विदश म अपन व्याख्याना आर प्रतिदिन प्रातः 4.30 बजे आयोजित ऑनलाइन प्रार्थनाओं के माध्यम से राज दीदी सकारात्मक विचार, वाणी और व्यवहार को बढ़ावा देने का संदेश.
नकारात्मक चर्चा से बचने की सलाह दी कार्यक्रम के दौरान राज दीदी ने नकारात्मक चर्चा, आलोचना और अनावश्यक पंचायती से बचने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि शब्दों की ऊर्जा व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है. कई साधकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए स्वीकार किया कि नकारात्मक सोच और चर्चा से जीवन में कठिनाइयां बढ़ती हैं, जबकि सकारात्मक दृष्टिकोण से परिस्थितियां बदल सकती हैं.सत्संग में उपस्थित लोगों ने नोटबुक और पेन के साथ महत्वपूर्ण बिंदुओं को लिखा और पूरे समय सक्रिय सहभागिता दिखाई. आयोजन समिति के अनुसार यह कार्यक्रम केवल प्रवचन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मसुधार और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक प्रभावी पहल रहा. उपस्थित नागरिकों ने इसे प्रेरणादायी, व्यावहारिक और जीवनोपयोगी बताया.