विधायिकाओें के लिए विधानमंडल सूचकांक आवश्यक

एमआईटी में 15वीं भारतीय छात्र संसद के उद्घाटन अवसर पर दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंदर गुप्ता ने कहा

    23-Feb-2026
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 कोथरुड, 22 फरवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

संसद में जाते समय व्यक्ति किसी दल का नहीं, बल्कि आम जनता का प्रतिनिधि होता है. इसलिए संसद की पवित्रता बनाए रखनी चाहिए. सदन में विवेक, संयम, तर्क-वितर्क और समस्याओं के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए और यह सब खेल भावना के साथ होना चाहिए. विधायकों और विधानमंडलों के लिए एक राष्ट्रीय विधानमंडल सूचकांक होना चाहिए, जिससे प्रत्येक राज्य के प्रदर्शन की जानकारी पारदर्शी तरीके से जनता के सामने आ सके. इसका मूल्यांकन भी ठोस निष्कर्षों के आधार पर होना चाहिए, ऐसे विचार दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंदर गुप्ता ने व्यक्त किए. उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में संवाद और संस्कृति को मजबूत करने के लिए रचनात्मक चर्चा और परस्पर सम्मान आवश्यक है. वे 15वीं भारतीय छात्र संसद के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे. एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी और एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय छात्र संसद का उद्घाटन समारोह शनिवार (21 फरवरी) को संपन्न हुआ. एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. वेिशनाथ दा. कराड ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. इस अवसर पर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह, वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक राजदीप सरदेसाई और जर्मनी (हैम्बर्ग) के जलवायु परिवर्तन प्रबंधन विशेषज्ञ प्रो. वाल्टर लील फिल्हो सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे. मंच पर भारतीय छात्र संसद के संस्थापक और एमआईटी डब्ल्यूपीयू के कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल वेिशनाथ कराड, कुलपति डॉ. आर. एम. चिटणीस और छात्र प्रतिनिधि सुमित खैरे, पायल झा, निखिल मिश्रा एवं अक्षिता सक्सेना भी उपस्थित थे. कार्यक्रम की शुरुआत में लोकतंत्र को मजबूत करने के प्रतीकात्मक रूप में गणमान्य व्यक्तियों ने मबेल ऑफ डेमोक्रेसीफ (लोकतंत्र की घंटी) बजाई गई. प्रमुख वक्ताओं में दिग्विजय सिंह ने कहा, हम सबसे पहले भारतीय हैं, धर्म और जाति उसके बाद आते हैं. लोकतंत्र को सक्षम बनाने के लिए हमें संविधान को बचाने की आवश्यकता है.राजदीप सरदेसाई ने कहा, राजनीति में प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, लेकिन वह खेल की तरह नियमबद्ध, सम्मानजनक और हार स्वीकार करने के धैर्य वाली होनी चाहिए. देश में सबसे बड़ी समस्या आने पर जो डटकर सामने आता है, वही सच्चा नेता होता है. अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. वेिशनाथ दा. कराड ने कहा कि दुनिया में बहुत तनाव और अशांति है. ऐसे समय में वेिश के देशों की नजरें भारत पर टिकी हैं. भारत को वेिशगुरु बनाने के लिए हमें जाति-पाति से ऊपर उठकर काम करना होगा. प्रो. वाल्टर लील फिल्हो ने सतत विकास पर अपने विचार व्यक्त किए. कुलपति डॉ. आर. एम. चिटणीस ने स्वागत भाषण दिया, डॉ. गौतम बापट ने कार्यक्रम का संचालन किया और डॉ. प्रसाद खांडेकर ने आभार व्यक्त किया.