नया ज्ञान-चिंतन और क्रांति के लिए द्वार खोल दो

    23-Feb-2026
Total Views |

knowledge
 
मैं आपसे कहता हूं : ‘नया निरंतर पैदा हाेता है. अगर हम बाधा न डालें, ताे नया पैदा हाेगी ही. लेकिन हम बाधा डालते हैं. हम रूकावट डालते हैं. हम काेशिश करते हैं पुराने काे बचाने की. और यह पुराने काे बचाने की जाे काेशिश है, यह धीरे-धीरे ऐसी रूग्ण, सड़ी हुई व्यवस्था बना देती है कि उसके भीतर जीना भी मुश्किल हाे जाता है, मरना भी मुश्किल हाे जात है. ठीक ऐसी हालत इस देश की हाे गई हैं.

नया ज्ञान चाहिए. नये जीवन के नियम चाहिए. राेज नये चाहिए, क्याेंकि काेई भी पुराना नियम थाेड़े दिन के बाद खतरनाक हाे जाता हैं.

वैसे जैसे कि छाेटे बच्चे काे हम पायजामा पहनाते हैं, फिर लड़का ताे ब ड़ा हाेता जाता है, और हम कहते है, पायजामा वही पहनाे. हम वे लाेग हैं जाे एक दा तय कर लिय कर लिया.

अब उसकी जान निकलती है, या ताे पायजामा बदले और नहीं ताे वह बड़ा हाेता जाता है और पायजामा बड़ा हाेता नहीं. काेई नियम बड़ा नहीं हाेता. क्याेंकि नियम ताे जड़ हैं और आदमी जिंदा है. आदमी बढ़ता है नियम जड़ हैं, वे कसे रह जाते है. अब वह पायजामा छाेटा पड़ गया और आदमी बड़ा हाेता जा रहा है. अब वह कहता है कि बड़ी मुश्किल में डाल दिए हैं, यह पायजामा हमारी जान लिए ले जा रहा है.

अब दाे ही रास्ते है उसके पास - या ताे वह नंगा खड़ा हाे जाए, और या िफर पायजामा बदले. पायजामा बदलने नहीं देते. ताे फिर वह नंगा खड़ा हाेने की काेशिश करता है.और यह हिंदुस्तान के समाज में इतना नंगापन, इतना ओछापन, इतनी मीननेस और इतना काइयांपन पैदा हुआ, उसका कारण है कि पुराने सब नियम छाेटे पड़ गए. नया नियम हम बनाते नहीं और पुराने नियम बदलना नहीं चाहते. ताे आदमी बिना नियम के खड़े हाेने की काेशिश करता है.

वह कहता है, कम से कम जिंदा ताे रहने दाे. हम जिंदा रहेंगे, आपका नियम अपने पास रखाे आप. और या िफर हाेता है कि आदमी पाखंडी हाे जाता है, हिपाेक्रेट हाे जाता है. ऊपर से दिखाता है कि नियम बिलकुल ठीक है, हम बिलकुल मानते हैं, और भीतर से नियम से उल्टा चलता है.

इस देश में हर आदमी दाेहरा हाे गया है. एक-एक आदमी के भीतर दाे-दाे आदमी हैं. एक वह आदमी है, जाे बाहर दिखाने के काम के लिए तैयार रखा जाता है; जब जरूरत हुई, उस आदमी काे ओढ़ लिया, निकल पड़े. घर आए, आदमी निकाल कर एक तरफ रखा, असली काम करने लगा. असली आदमी काम करता है, नकली आदमी ओढ़ने के मतलब आता है. हम सब.

इस पूरे देश की व्यवस्था ने ऐसी हालत खराब कर दी है, क्याेंकि नियम ऐसे जड़ हाे गए हैं कि वे हिलने नहीं देते-और हिलना पड़ेगा.

मैं आपसे कहना चाहता हूं नया चिंतन, नये समाज, नई क्रांति, इन सब दिशाओं में साेचने के लिए मन के द्वार खुले रखिए. ऐसे मत साेचिए कि सब पुराना है, इसलिए नये की काेई जरूरत नहीं है. कुछ भी पुराना नहीं है, राेज नये की जरूरत है.